कैग ऑडिट रिपोर्ट में स्कूलों में बनाए गए शौचालयों में कई अनियमितताएं उजागर

-11 फीसदी शौचालयों के बारे में कोई जानकारी नहीं

नई दिल्ली (New Delhi) . देश के शासकीय विद्यालयों में शौचालय बनाने की केंद्र सरकार (Government) की महात्वाकांक्षी योजना में बड़ी लापरवाही का खुलासा कैग की संसद में पेश एक ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है. सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज द्वारा स्कूलों में बनाए गए शौचालयों में कई अनियमितताएं पाई गई हैं. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 11 फीसदी शौचालयों के बारे में कोई जानकारी नहीं है वो बने हैं या नहीं बने. जबकि 30 फीसदी ऐसे शौचालय हैं जिसमें गंदगी या पानी नहीं होने इस्तेमाल में नहीं है. मानव संसाधन विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक 53 सीपीएसई ने इस प्रोजोक्ट में हिस्सा लिया और 1,40,997 शौचालय बनाए गए. कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 3 मंत्रालयों में से 7 सीपीएसई ने 1,30,703 शौचालय बनाए जिसमें 2,162.60 करोड़ रुपये खर्च हुए. इन मंत्रालय में बिजली मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय और कोयला मंत्रालय शामिल हैं.

कैग ने एनटीपीसी, पीजीसीआईएल, एनएचपीसी, पीएफसी, आरईसी, ओएनजीसी और कोल इंडियाद्वारा बनाए गए शौचालयों की जांच की. जिसमें 15 राज्यों में बनाए गए 2,695 शौचालय का सर्वे किया. जिसमें कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑडिट सैंपल में 2,695 शौचालयों में से सीपीएसई ने 83 शौचालय नहीं बनाए, हालांकि इन शौचालयों को बनाया हुआ दिखाया गया है. बाकी 2,612 शौचालयों में 2000 शौचालयों का कोई अता पता नहीं है. जब कि 86 शौचालयों का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है. कुल मिलाकर ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया है कि 11 फीसदी शौचालय नहीं बने जिसमें अधूरा निर्माण भी शामिल है. कैग के मुताबिक, 1,967 स्कूल को-एजूकेशन (लड़के-लड़कियां दोनों एक साथ पढ़ते हैं) थे. इन स्कूलों में 99 स्कूलों में शौचालय चालू नहीं थे.

जबकि 436 स्कूलों में सिर्फ एक शौचालय का इस्तेमाल हो रहा था. लड़के और लड़कियों को अलग से शौचालय मुहैया कराने के लिए 535 स्कूलों में यह लक्ष्य अभी तक पूरा नहीं किया गया है. यह 1,967 स्कूलों में 27 फीसदी है. कैग के मुताबिक, 2,326 स्कूलों में बने शौचालयों में से 1,679 यानी करीब 72 फीसदी शौचालय में पानी की सुविधा नहीं थी. जबकि 1,279 यानी करीब 55 फीसदी शौचालयों में हाथ धोने की सुविधा नहीं थी. इसके साथ ही शौचालय ढंग से नहीं बनाए गए. लिहाजा उनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था.

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