Monday , 28 September 2020

नए नगरीय क्षेत्रो में पर्याप्त ग्रीन व ब्लू स्पेस जरूरी

उदयपुर (Udaipur). आबादी विस्तार के साथ बनने वाले  नए उपनगरीय क्षेत्रों में न्यूनतम चालीस प्रतिशत हरित क्षेत्र रखा जाना जरूरी है. हर नए उपनगरीय क्षेत्र के समस्त पुराने तालाबो, बावड़ियों को यथावत रख उनका संरक्षण होना चाहिये. साथ ही  शहरी क्षेत्र मे रहने वाले छोटे वन्य जीवों व पक्षियों के आवास स्थलों को भी सुरक्षित रखा जाना चाहिए यह  विचार रविवार (Sunday) को आयोजित संवाद में रखे गए.
 इंडिया वाटर पार्टनरशिप के तत्वावधान में हुए संवाद में  स्वच्छ पर्यावरण व शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक स्वास्थ्य  के लिए ग्रीन व ब्लू स्पेस की उपयोगिता को रेखांकित किया गया. राज्य  के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन  संरक्षक व एच सी एम रीपा के अतिरिक्त निदेशक वेंकटेश शर्मा ने कहा कि  वन नीति में तैतीस प्रतिशत वन क्षेत्र की आवश्यकता बताई है लेकिन    नगरीय क्षेत्रों में   वाहन जनित व शहरी जीवन शैली से पनपने वाले प्रदूषण के नियंत्रण के लिए अधिक हरित क्षेत्र जरूरी है.
झील संरक्षण समिति के डॉ तेज राज़दान व डॉ अनिल मेहता ने कहा कि सतही जल व भूजल के स्थायित्व व पर्याप्त उपलब्धता के लिए पारंपरिक जल स्त्रोतों को बचा कर रखा जाना आवश्यक है.   यह बाढ़ व सूखे दोनों से सुरक्षा प्रदान करते है. नागरिको  की सक्रिय भूमिका  व जुड़ाव  से ही जलस्त्रोत बचे रह सकते हैं. झील विकास प्राधिकरण के सदस्य तेज शंकर पालीवाल  व गांधी मानव कल्याण समिति के निदेशक नंद किशोर शर्मा ने  कहा कि पहाड़,पेड़, पानी को संरक्षित करते हुए ही नगरीय विस्तार होना चाहिए. पहाड़ो पर आबादी विस्तार पर अंकुश होना चाहिए व हर व्यक्ति को कम से कम दस वृक्षो का रोपण व संरक्षण की जिम्मेदारी लेनी  चाहिए.
शिक्षाविद कुशल रावल व झील प्रेमी रमेश चंद्र राजपूत, द्रुपद सिंह, पल्लब दत्ता ने युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि वो  हरित व नीले क्षेत्रो को बचाने व एक सुंदर स्वस्थ नगर को बनाने में सक्रिय भूमिका निभाए. संवाद से पूर्व  श्रमदान कर पिछोला बारीघाट से   झील में  तैरती  शराब पानी की बोतलों,पॉलीथिन व घरेलू कचरे को बाहर निकाला गया. श्रमदान में रमेश चंद्र राजपूत,द्रुपद सिंह चौहान,राम लाल गहलोत,कुशल रावल,गोपाल कुमावत, झील विकास प्राधिकरण सदस्य तेज शंकर पालीवाल,पर्यावरण विशेषज्ञ नंद किशोर शर्मा ने भाग लिया.
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