अयोध्या में बनने जा रहे एयरपोर्ट का नाम ‘मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम’ होगा


अगले साल दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा

अयोध्या (Ayodhya) . भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या (Ayodhya) में बनने जा रहे एयरपोर्ट का नाम ‘मर्यादा पुरुषोत्तम राम’ होगा,इस अगले साल दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा. इस तरह यह उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) में पांचवा एयरपोर्ट होगा जो अंतरार्ष्ट्रीय स्तर का होगा. अभी लखनऊ (Lucknow) में चौधरी चरण सिंह तथा वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट अंतरार्ष्ट्रीय स्तर का है. भगवान बुद्ध की निर्माण स्थली कुशीनगर तथा जेवर में बन रहे एयरपोर्ट को भी अंतरार्ष्ट्रीय स्तर के मानकों के अनुसार बनाया जा रहा है. कुशीनगर एयरपोर्ट साल 2020 के नवंबर तक काम करने लगेगा.इसकी पहली उड़ान लंका के कोलंबों के लिए होगी.

आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार (Wednesday) को बताया कि राम मंदिर (Ram Temple) बनने के बाद अयोध्या (Ayodhya) में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि होगी. इसके लिए राज्य सरकार (Government) ने एयरपोर्ट के विस्तार की योजना बनाई है. गौरतलब है कि अप्रैल 2017 तक अयोध्या (Ayodhya) एयरपोर्ट का विकास दो चरणों में करने की योजना थी. इसके लिए हुए टेक्नो इक्नोमिक सर्वे में पहले चरण में एटीआर-72 विमानों के लिए विकसित किया जाना था. इसमें रन-वे की लंबाई 1680 मीटर रखी जानी थी. दूसरे चरण में ए-321,200 सीटर विमानों के संचालन के लिए एयरपोर्ट विकसित होना था. इसमें रन-वे की लंबाई 2300 मीटर प्रस्तावित थी. बाद में मुख्यमंत्री (Chief Minister) योगी ने एयरपोर्ट को बोइंग-777 विमानों के योग्य बनाने और उसका नाम बदलने की घोषणा की थी. इसके बाद भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने पिछले साल पांच मई को भौतिक सर्वे करने के बाद संशोधित रिपोर्ट प्रस्तुत किया था.

रिपोर्ट के मुताबिक पहले चर में ए-321 विमानों के संचालन के लिए 463.10 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी. इसमें रन-वे की लंबाई 3,125 मीटर और चौड़ाई 45 मीटर होगी. दूसरे चरण में बाइंग 777 जैसे बड़े विमानों के संचालन के लिए 122.87 एकड़ जमीन की अतिरिक्त आवश्यकता होगी. इसमें रन-वे की लंबाई 3,750 मीटर और चौड़ाई 45 मीटर होगी. वहीं, एयरपोर्ट के संचालन व सुरक्षा से जुड़े कर्मचारियों के आवासीय क्षेत्र के लिए आसपास 15 एकड़ भूमि की जरूरत बताई गई. इस तरह एयरपोर्ट के लिए कुल 600 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी.

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