मेरठ की महिलाएं बोलीं- पवन जल्लाद पर है नाज़


मेरठ (Meerut) . निर्भया के दोषियों को फांसी के फंदे पर लटकने के बाद मेरठ (Meerut) के लोग डबल ख़ुशी महसूस कर रहे हैं. ख़ुशी इस‎लिए कि आखिरकार निर्भया के दोषियों को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया और डबल ख़ुशी इस बात की कि मेरठ (Meerut) के ही पवन जल्लाद ने उन्हें फांसी पर लटकाया. ख़ासतौर से महिलाएं शुक्रवार (Friday) को इंसाफ के त्यौहार की संज्ञा दे रही हैं. महिलाओं ने कहा कि उन्हें पवन जल्लाद पर नाज़ और फक्र है.

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पवन क्रान्ति की नगरी के वो सिपाही हैं, जिन्होंने एक साथ 4 दोषियों को फांसी देकर इतिहास रच दिया. इससे पहले शुक्रवार (Friday) सुबह साढ़े पांच बजे निर्भया के चारों दोषियों को मेरठ (Meerut) के पवन जल्लाद ने दिल्ली की तिहाड़ जेल फांसी के फंदे पर लटका दिया. पवन का नाम भी आज इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी जल्लाद ने चार दोषियों को एक साथ फांसी पर लटकाया हो.

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गौरतलब है ‎कि पवन से पहले उसके दादा कालूराम ने एक साथ 2 दोषियों को फांसी दी थी. दिल्ली के जीसस मेरी कॉलेज की स्टूडेंट्स गीता चोपड़ा और उनके भाई संजय चोपड़ा की हत्या (Murder) करने वाले कुख्यात अपराधी रंगा-बिल्ला को कालूराम ने फांसी पर लटकाया था. इसके बाद कालूराम ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या (Murder) करने वाले सतवंत सिंह और षड्यंत्र रचने वाले केहर सिंह को भी फांसी पर चढ़ाया.

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