उदयपुर की बजाए बॉर्डर इलाकों से भेजे जा रहे हैं बाल श्रम में नाबालिक बच्चे और बच्चियां

उदयपुर (Udaipur). गुजरात (Gujarat) में दीपावली से पूर्व होने वाली बीटी कपास की खेती के लिए आदिवासी बाहुल्य के उदयपुर (Udaipur) जिले से भारी तादाद में नाबालिक बच्चे वह बच्चियों के जाने की सूचना है फर्क इतना है अब इन बच्चों की मानव तस्करी करने वाले मैच व चालक इन उदयपुर (Udaipur) के शहरी क्षेत्रों से बसों में भेजने की बजाय गुजरात (Gujarat) बॉर्डर से इन्हें निजी बसों में या निजी वाहनों से ले जाने के काम में तेजी से लगे हुए हैं.

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष के शुरुआती दौर में बीटी कपास की खेती के लिए गुजरात (Gujarat) के सूरत (Surat) सहित विभिन्न जिलों में बाल श्रम के लिए ले जाए जाने वाले नाबालिक बच्चे और बच्चियों की रोकथाम के लिए चलाए गए विशेष अभियान में स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ मानव तस्करी यूनिट थाना, स्वयंसेवी संस्था चाइल्ड लाइन, बाल सुरक्षा नेटवर्क, आजीविका ब्यूरो एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के साझा प्रयासों से कई बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराया गया तथा इन गुजरात (Gujarat) जाने से रोका गया.

बाल कल्याण समिति के पूर्व सदस्य एडवोकेट हरीश पालीवाल ने बताया कि लॉकडाउन (Lockdown) के बाद एवं दीपावली से पूर्व गुजरात (Gujarat) में बीटी कपास की खेती बहुतायत होती है इसके अलावा सूरत (Surat) में त्योहार रूप से पूर्व साड़ी एवं डायमंड के कार्य में बच्चों की अधिक आवश्यकता होती है इसलिए उदयपुर (Udaipur) के गोगुंदा सायरा पारनवा बेकरिया ओगणा झाडोल क्षेत्रों से नाबालिक बच्चे और बच्चियों को रुपयों का लालच देकर कई सारे दलाल व मेट बच्चों को गुजरात (Gujarat) ले जाने के कामों में लगे हैं.

पूर्व सदस्य एडवोकेट हरीश पालीवाल ने बताया कि पिछले दिनों अनलॉक डाउन 1 व 2 के दौरान बेकरिया व झाडोल क्षेत्र से गुजरात (Gujarat) ले जाए जा रहे बच्चों को रोकने की पुलिस (Police) ने कार्रवाई कर मुकदमे दर्ज किए है इसके अलावा उदयपुर (Udaipur) में रेती स्टैंड बस स्टैंड उदयपुर (Udaipur) और सवीना क्षेत्रों से भी निजी बसों से बच्चों को गुजरात (Gujarat) ले जाए जाने की कार्रवाई या होने से बच्चों की तस्करी करने में लगे मेट व दलाल ने अब बच्चों को गुजरात (Gujarat) भेजने के रास्ते वह स्थान बदल लिए हैं. आजीविका ब्यूरो के ग्रास रूट लेवल पर काम कर रहे कार्यकर्ताओं को प्रतिदिन बच्चों के हाईवे मैं खेरवाड़ा पार करा कर निजी बसों में भरकर एवं निजी बसों के माध्यम से खेरवाड़ा हाईवे कोटडा व झाडोल से गुजरात (Gujarat) बॉर्डर में प्रवेश कर सूरत (Surat) भेजे जाने की जानकारियां मिली है.

इधर, उदयपुर (Udaipur) क्षेत्र में बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर कार्यरत बाल सुरक्षा नेटवर्क अपनी सहयोगी संस्थाओं एवं संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर सक्रिय रुप से कार्य कर रहा है. नेटवर्क के सहयोगी संस्थान आजीविका ब्यूरो के साथी समन्वयक संतोष पुनिया एवं टीम को प्रतिदिन नेटवर्क को उदयपुर (Udaipur) से बालश्रम के लिए तथा उदयपुर (Udaipur) के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में गोगुंदा, कोटडा, बेकरिया, ओगणा एवं झाडोल के विभिन्न क्षेत्रों से गुजरात (Gujarat) बीटी कपास के लिए ले जाए जाने की सूचना दे रहे हैं.

मामले की गंभीरता को देखते हुए नेटवर्क के संयोजक बीके गुप्ता आजीविका के संतोष पुनिया एवं बाल कल्याण समिति के पूर्व सदस्य एवं बाल अधिकार विशेषज्ञ एडवोकेट हरीश पालीवाल ने ऋषभदेव पुलिस (Police) उप अधीक्षक विक्रम सिंह को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए निजी बसों की चेकिंग करने व निजी बसों में क्षमता से अधिक भरकर अथवा 5 से अधिक बच्चों के लिए जाने की पुख्ता जांच कर बाल श्रम को रोकने का आग्रह किया गया है.

क्षेत्रीय पुलिस (Police) उप अधीक्षक विक्रम सिंह ने अपने सर्कल के खेरवाड़ा पहाड़ा एवं बाबलवाड़ा थाना अधिकारियों को छुट्टियों में निजी वाहनों से क्षमता से अधिक बस या ट्रकों में बच्चों के ले जाए जाने तथा निजी बसों में बच्चों के ले जाने की पुख्ता जांच करने तथा त्योहारों पूर्व इस जांच को नियमित कर बाल श्रम को रोके जाने का आग्रह किया है.

बाल सुरक्षा नेटवर्क में यही आग्रह झाडोल के पुलिस (Police) अधीक्षक से भी कर गुजरात (Gujarat) जाए जाने वाले प्रत्येक वाहन की संवेदनशील होकर जांच करने तथा बाल श्रम रोकने के लिए कहां है.

यहां बता दें, बाल श्रमिक लड़के व लड़कियों के विरुद्ध पिछले दिनों जिला विधिक सेवा प्राधिकरण  एवं स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा उदयपुर (Udaipur) में हुई कार्रवाईयों के बाद मेट एवं दलालों ने अपना तरीका बदलने के बाद इन्हें अपने ग्रामीण क्षेत्र से प्राइवेट गाड़ियों के द्वारा उदयपुर (Udaipur) से बसों में नहीं बिठाकर ऋषभदेव, खेरवाड़ा, उदयपुर (Udaipur) जिले के बॉर्डर से प्राइवेट बसों में बिठाकर अथवा  निजी वाहनों से गुजरात (Gujarat) सूरत (Surat) व अन्य जिलों में भेजा जा रहा है. इस तरह की सूचना गोपनीय तरीके से आजीविका ब्यूरो के ग्रास रूट लेवल के लोगों ने दी है.

ऋषभदेव व्रताधिकारी सर्किल के थाना क्षेत्र ऋषभदेव परसाद, एवं गुजरात (Gujarat) सीमा से लगे खेरवाड़ा, पहाड़ा एवं बाबलवाड़ा थाना अधिकारी एवं बाल कल्याण अधिकारी को आवश्यक रूप से निर्देशित किया गया है कि वह गुजरात (Gujarat) जाने वाली प्राइवेट बस एवं ट्रेवल्स की बसों को विधिवत रूप से चेक करें और इनमें बीटी कपास की खेती के लिए गुजरात (Gujarat) ले जाए जा रहे उदयपुर (Udaipur) बच्चों के परिवहन व मानव तस्करी के जोखिम कार्यों को रोकने में पूरी संवेदनशीलता बरतें.

बाल सुरक्षा नेटवर्क एवं आजीविका ब्यूरो ने आमजन से अपील की है कि वह जहां भी नाबालिग बच्चों को संदिग्ध रूप से 5 से अधिक संख्या में देखें तो तत्काल संबंधित पुलिस (Police) को सूचित करें ताकि दलालों पर कार्रवाई की जा सके और सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके

बीके गुप्ता संयोजक बाल सुरक्षा नेटवर्क

आजीविका ब्यूरो एवं संगठित विभिन्न एनजीओ के कार्यकर्ताओं से भी यह अपील की गई है कि वह ग्रामीण क्षेत्रों में अचानक नहीं दिखने वाले बच्चों पर निगरानी रखें और उनके परिजनों से संपर्क कर उनके अचानक पलायन की जानकारी जुटाकर नेटवर्क के माध्यम से प्रशासन को सूचित करें

 हरीश पालीवाल, एक्स सदस्य बाल कल्याण समिति एवं बाल सुरक्षा नेटवर्क उदयपुर (Udaipur)

आजीविका ब्यूरो ने अपने ग्रास रूट लेवल के सभी सदस्यों से बच्चों के पलायन की पुख्ता सूचना ब्यूरो, नेटवर्क एवं पुलिस (Police) के जिम्मेदार अधिकारियों को देकर बाल श्रम पलायन रोकने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाने के लिए आग्रह किया है.

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