विचार मंथन / गर्व है भारत की एकता पर : सिद्वार्थ शंकर


देश की जनता ने एक बार फिर पूरे विश्व में यह संदेश दिया कि भारत की एकता कितनी मजबूत है. कोरोना (Corona virus) से लडऩे के लिए रविवार (Sunday) को जनता कर्फ्यू (Curfew) का ऐलान किया गया. रविवार (Sunday) को सुबह 7 से रात 9 बजे तक सभी नागरिकों को बाहर न निकलने की बात कही गई है. कोरोना (Corona virus) को फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘जनता कफ्र्यूÓ का यह आईडिया निश्चित तौर पर हमारे देश के वैज्ञानिक और वर्तमान समय में धरती पर भगवान, डॉक्टर (doctor) के साथ एक साथ विचार-विमर्श से निकला होगा. इसे हम शानदार विचार कह सकते हैं, हो सकता है आने वाले दिनों में हमारे पड़ोसी नेपाल, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के साथ अन्य देशों में भी इसका चलन शुरू हो क्योंकि इस रोग से बचने के लिए पूरा विश्व भारतीय संस्कृति की पहचान ‘नमस्तेÓ को अपना रहा है.

भारत सिर्फ यही तक रुका नहीं है, उसने सार्क देशों के साथ कोरोना (Corona virus) पर नेतृत्व करने के बाद अब वह जी-20 के माध्यम से पूरे विश्व को एक मंच पर लाना चाहता है. इसके लिए जल्द ही वर्चुअल मीटिंग आयोजित होने वाली है, जिसकी मंजूरी मिल चुकी है. पूरी दुनिया इस वक्त सदमे में जी रही है, जहां कभी लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता था, जहां पर पैर रखने की जगह नहीं होती थी आज उन जगहों पर सन्नाटा पसरा है. इन सब बुरी खबरों के बीच कुछ अच्छी खबरें भी हमें नई उम्मीद जगाती हैं. जैसे भारत में मलेरिया की दवा क्लोरोक्विन का प्रयोग करके मरीजों को ठीक किया जा रहा है.

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जो लोग इस भ्रम में है कि यह कोई आम वायरस है जो आता जाता रहता है न्यूजपेपर और न्यूज चैनलों का सुर्खियां बनता है और डराता है फिर अचानक जाता है तो है तो ऐसे लोगों को अब सतर्क रहने की आवश्यकता है तथा उन्हें अपनी मानसिकता त्याग देनी चाहिए और भीड़भाड़ जगहों में आना-जाना कम करना चाहिए तथा मास्क लगाकर सैनिटाइजर (Sanitizer) का प्रयोग करे और कुछ दिन के लिए हम घर पर रहें, बाहर न निकलें क्योंकि भारत में यह वायरस कम्युनिटी ट्रांसमिशन के स्टेज में नहीं है, परंतु सरकार (Government) ने एकदम संतुलित सटीक और सहयोगी कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए जरूरी बातों का पालन कर इस महामारी (Epidemic) की लड़ाई को जीतने में अपना सहयोग करना चाहिए.

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कुछ लोग मास्क को उचित दाम पर न बेचकर औने पौने दाम पर बेच रहे हैं सवाल है कि क्या इमरजेंसी (Emergency) की हालात में हम ऐसे अपने देश की सेवा इस तरह करेंगे? अभी हम कोरोना (Corona virus) के फेज टू में हैं. हमें इसे यहीं पर रोकना होगा. वायरस को हमने 31 मार्च तक फेज 3 में जाने से रोक दिया तो समझ लीजिए कि हमने जंग जीत ली अन्यथा फेज 3 में पहुंचते ही हमारी हालत क्या होगी उसकी कल्पना भी भयावह है.

महामारी (Epidemic) ऐसी चीज है जिसमें हर क्षण जीवन, दूसरे क्षण शून्य की आहट झूलती रहती है. कुछ लोग युद्ध में भाग लेते हैं, कुछ युद्ध से भागते हैं, कुछ उसी में अपना मुनाफा काट लेते हैं. महामारियां आपको अचानक पकड़ती हैं, जबकि आप निश्चिंत होकर अपनी योजनाओं, लाभ-हानि के खातों या अमरता के अहसास की रातों से गुजर रहे होते हैं. उन रातों में न्यूनतम आपका लक्ष्य नहीं होता, अधिकतम भी आपको न्यूनतम लगता है.

तभी अचानक अनिश्चित भय से बत्ती गुल होती है और एक झटके में, अपराजेय साहस से सज्जित जीवन का प्रकाश सर्वाधिक काम्य हो उठता है. उसकी हल्की सी झलक भी, अमरता के अहसास की रातों का अप्रतिम उत्तर होती हैं. कोरोना ने हमारी बेताबी, बेईमानी, बेबाकी-सबका परीक्षण करने का मौका दिया है. सरकारों, व्यवस्था तंत्रों, धनिकों, विद्वानों, अज्ञानियों, अर्थशास्त्रियों, दानियों, स्वार्थियों-सबके लिए विलक्षण एकांत है. कई ब्रांड कोरोना में हाथ धो रहे हैं, कई सपनों के सौदागार आपके एकांत को खुशनुमा बनाने के लिए भारी छूट के ऑफर पर उतर आए हैं.

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कोरोना-नमस्कार से लेकर कोरोना-ध्यान तक धुंधाधार चल रहा है. यह धुआं आपके एकांत को बाजार से अनुपस्थिति कर दिए गए शोर से भर देना चाहता. उसका मुकाबला एकांत में इस तरह से किया जा रहा है जैसे भारी बारिश में पकौड़े का आनंद उठाते हुए, सामने की झोपड़ी के पानी में बह जाने पर चिंता खर्च की जाए.

यह हमारी कोरोना से लडऩे की प्रतिबद्धता ही तो है जो आज हमें सुरक्षित बनाए हुए है पर हमें अभी पूरी जंग जीतनी है जिसके लिए सामाजिक दूरी जरूरी है इस कारण अब हम सब का यही नारा होना चाहिए. कोरोना को देंगे मात जनता कर्फ्यू (Curfew) के साथ.

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