Wednesday , 28 October 2020

राज्य के वन्यजीवो के लिए डॉक्टरों की भारी कमी


जयपुर (jaipur) . कोरोना काल में जहां सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर्स, नर्स (Nurse) की कमी की खबरें प्राय: रोजाना सामने आ रही है इसके ठीक उलट राज्य के वन अभ्यारण्यों में भी वन्यजीवों का ईलाज करने वाले डॉक्टरो की भी कमी है इसलिए ऑनलाइन कॉल वन्यजीव चिकित्सक बुलाये जा रहे है और सरिस्का, रणथम्भौर, उदयपुर (Udaipur) और जोधपुर में चिकित्सकों का जिम्मा वनकर्मी ही संभाल रहे है वहीं जरूरत पडऩे पर पशु चिकित्सक को फोन करके बुला रहे हैं. इस समस्या को लेकर हाल ही में वन विभाग के अधिकारियों ने राज्य वन्यजीव मंडल की 11 वीं बैठक में मुख्यमंत्री (Chief Minister) अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के सामने भी डॉक्टर्स की समस्या रखी गई.

प्रदेशभर के वन अभयारण्य और टाइगर सेंचुरी देश ही नहीं दुनियाभर में ख्याति पा चुके है इनमें प्रवास कर रहे वन्यजीवों का दीदार के नाम पर सरकार (Government) को सालाना लाखों रुपये की कमाई हो रही है इसके बावजूद भी इनकी ओर जिम्मेदारों का ध्यान नहीं है खासकर वन्यजीवों के स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही बरती जा रही है. स्थिति यह है कि, टाइगर रिजर्व और बड़े-बड़े जैविक उद्यान में वन्यजीव चिकित्सक नहीं होने से वन्यजीव के स्वास्थ्य की देखभाल का जिम्मा वनकर्मी और केयर टेकर संभाल रहे है.

अति आवश्यक होने पर पशु चिकित्सालय से चिकित्सक को फोन करके बुलाया जाता है यह अनदेखी कई बार वन्यजीवों के लिए हानिकारक साबित हो सकती है. उदयपुर (Udaipur) स्थित सज्जनगढ़ जैविक उद्यान, जोधपुर स्थित माचिया जैविक उद्यान ही नहीं, टाइगर रिजर्व में भी यहीं हालात नजर आ रहे हैं. अफसरों के ढीले रवैए के चलते चिकित्सक भी आने में कोई खास रूचि नहीं दिखा रहे हैं. ऐसे में यहां स्थानीय पशु चिकित्सालय से कभी-कभार पशु चिकित्सक आते हैं और देखकर चले जाते हैं. कई बार स्थिति ज्यादा गंभीर होने पर जयपुर (jaipur) से ही वन्यजीव चिकित्सक को भेजना पड़ता है.

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