बच्चे को शेयर करना सिखायें


तीन साल की उम्र से ही बच्चों को अपनी चीजें दूसरे के साथ शेयर करना सिखाना चाहिए. इसी उम्र से चीजें बांटने के साथ-साथ बच्चे एक-दूसरे के साथ अपनी भावनाएं बांटना भी सीखते है. इससे बच्चे बड़े होकर व्यवहार कुशल और सहयोगी प्रवृति के यानी सामाजिक बनते हैं.

आप सिखाएंगी, वो सीखेगा

बच्चों के मन में अपनी चीजों को लेकर एकाधिकार की भावना होती है और वे अपनी चीजें दूसरों के साथ बांटना नहीं चाहते. ऐसे में आप खुद बच्चे के साथ उसकी चीजें शेयर करें, क्योंकि हर चीज बच्चा सबसे पहले घर से ही सीखता है. बच्चे की चीजों को शेयर करने के साथ आप अपनी चीजें भी दूसरों के साथ शेयर करें. बच्चा देखकर कई चीजें खुद ही सीख लेता है. अगर वह आपके साथ कुछ भी शेयर करने से मना करे तो आप उसे प्यार से समझाएं कि अकेले खाना या खेलना अच्छी बात नहीं, इसलिए मम्मी-डैडी या दादा-दादी को भी दो.

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धीरे-धीरे सीखेगा बांटना

बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होगा, अपनी चीजें दूसरों के साथ साझा करना भी सीख लेगा. कोई बच्चा कम उम्र में परिपक्व हो जाता है, तो किसी को इसमें वक्त लगता है. जरूरी नहीं है कि हर बच्चा एक ही उम्र में परिवक्व होगा, पर यह जरूर है कि सही चीजें और सही सीख उन्हें सही दिशा देती है. कुछ बच्चों में शेयरिंग की आदत आने में समय लग जाता है और कुछ यह गुण जल्दी सीख लेते हैं. तो धैर्य के साथ बच्चे को शेयरिंग करना सिखाएं, वह जरूर सीखेगा.

न करें जबरदस्ती

बच्चों को शेयरिंग सिखाने में जबरदस्ती बिल्कुल न करें. ध्यान रहे कि शुरू में बच्चों को उन चीजों को बांटने को कहा जाए जो उनके लिए बहुत ज्यादा मायने न रखती हों. बच्चा ऐसे में बांटना सीखेगा. अगर आप बच्चे की सबसे पसंदीदा चीज उसे किसी के साथ साझा करने के लिए कहें, तो यह भी ठीक नहीं है क्योंकि अपनी प्यारी चीज को अक्सर बड़े भी शेयर नहीं करते. हमेशा यह याद रखें कि आखिरकार वह एक बच्चा ही है, तो सब कुछ शेयर करने की उम्मीद उससे न करें. खासकर उसकी पसंदीदा चीज. सच यही है कि कुछ चीजें ऐसी हैं, जिसे आपका बच्चा शेयर नहीं करना चाहता. आप इतना कर सकती हैं कि हालात ऐसे बनाएं कि आपके बच्चे को शेयर करना ही पड़े. जैसे यदि दूसरा बच्चा आपके घर आया है तो दो चीजें रखें और उसमें से एक उसे जरूर दें. इससे बच्चा आसानी से शेयर करना सीखेगा. तो बच्चे को आजमाने की जगह उनको शेयरिंग की आदत पड़ने दें. एक बार जब वह शेयर करना सीख ले, तब आप उससे बड़ी उम्मीदें कर सकती हैं.

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तारीफ के दो बोल

बच्चों की तारीफ की जाए तो वे और भी उत्साहित होते हैं. उनके जिस काम की प्रशंसा की जाती है, उसे वह दोगुने उत्साह के साथ आगे बढ़कर पूरा करते हैं. कभी बच्चा अपनी चीज दोस्तों के साथ बांटे यानी अपने खिलौने या अन्य चीजों को शेयर करे, उसकी प्रशंसा जरूर करें. हो सके तो सबके सामने. घर के अन्य सदस्यों को भी उसकी तारीफ करने के लिए कहें. इससे खुश होकर आपका बच्चा खुद आगे बढ़कर अपने दोस्तों के साथ अपनी चीजें बांटने लगेगा.

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