Saturday , 26 September 2020

अयोध्या में मेहमानों को कार्ड बंटने शुरू


नई दिल्ली (New Delhi) . अयोध्या में राम मंदिर (Ram Temple) निर्माण के लिए पांच अगस्त को भूमि पूजन का कार्यक्रम है. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल होंगे. इसके मद्देनजर सुरक्षा बंदोबस्त भी कड़े किए गए हैं. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं. चंपत राय ने कहा कि भूमि पूजन कार्यक्रम में यहां से लेकर नेपाल के संतों तक को बुलाया गया है. कुछ लोग संतों को भी दलित कहते हैं जबकि वो लोग भगवान के लोग हैं. भारत के भूगोल का हर हिस्सा यहां पर रहेगा.

प्रेस कॉनफ्रेंस में चंपत राय ने बताया कि संत महात्मा मिलाकर करीब 175 लोग शामिल होंगे. पद्मश्री पा चुके फैजाबाद के मोहम्मद यूनुस को बुलाया गया है. वो लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करते हैं. वो चाहे जिस धर्म के हों. सुरक्षा बंदोबस्त के बारे में बताते हुए चंपत राय ने कहा कि निमंत्रण पत्र पर सिक्योरिटी कोड है. ये केवल एक बार ही काम करेगा. जो प्रवेश करेगा एक बार अंदर जाने के बाद दोबारा वापस नहीं आ सकता. कोई भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं जा सकता. चंपत राय ने बताया कि हर एक कार्ड पर नंबर है और उसी के आधार पर पुलिस (Police) प्रवेश देगी. मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कैमरा नहीं ले जा सकते. कार्ड पर नंबर और नाम क्रॉस चेक होगा. यह नॉन ट्रांसफरेबल होगा. इसमें किसी भी तरह की कोताही नहीं होगी. चंपत राय ने बताया कि ये कार्ड अयोध्या में निवास करने वाले मेहमानों को दिया जा रहा है. बाहर वालों को फोन पर सूचना देकर बुलाया गया है.

यहां आने पर कार्ड दिया जाएगा. किसी को भी वाहन का पास नहीं दिया गया है. सभी को वाहन बाहर ही छोड़ना होगा. उन्होंने बताया कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, राज्यपाल और मुख्यमंत्री (Chief Minister) योगी आदित्यनाथ के नाम कार्ड पर छापे गए हैं. समारोह से कुछ घंटे पहले कार्ड आमंत्रितों के पास पहुंचा दिए जाएंगे. चंपत राय ने इंतजाम के बारे में बताया कि अमावा मंदिर के सामने पार्किंग स्थल होगा. ढाई सौ कदम चलकर संत समारोह स्थल पर पहुंचेंगे. साढ़े दस बजे तक प्रवेश सुनिश्चित कर लिया जाएगा. सुबह आठ से दोपहर बाद दो बजे तक कार्यक्रम चलेगा. चंपत राय ने कहा कि कुछ लोगों ने रामलला के हरे वस्त्र पहनने पर भी सवाल उठाए हैं. ये तो परम्परा से होता आया है. ये पेड़ों की हरियाली क्या इस्लाम है हरी साग सब्जी क्या इस्लाम खाना है? ये तो भारत और दुनिया की समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है. इसे आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए. ये बौद्धिक दिवालियापन है.

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