वर्कप्लेस डिप्रेशन से बचाव के लिए व्यायाम को दिनचर्या में करें शामिल


नई दिल्ली (New Delhi) . कार्पोरेट कल्चर के चलते कर्मचारी आजकल तनाव में अपना सुख-चैन खो बैठते हैं. एक अध्ययन के अनुसार, इंडिया इंक का हर पांच में से एक कर्मचारी वर्कप्लेस डिप्रेशन से जूझ रहा है. काम का दबाव, दफ्तरों का माहौल, अनावश्यक राजनीति, घर और दफ्तर के बीच का मुश्किल तालमेल आदि ऐसे तमाम कारक हैं, जिनसे तनाव पैदा होता है. आप जिस दफ्तर में दिन-रात काम कर रहे हैं, वहां के माहौल और रहन-सहन का मानसिक और शारीरिक, दोनों तरह के स्वास्थ्य पर बहुत असर पड़ता है, क्योंकि 24 घंटे में से कम से कम 8 घंटे सामान्य तौर पर दफ्तरों में गुजरते हैं, जो जीवनशैली का एक बड़ा हिस्सा है.

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सामान्य तौर पर पूरे दिन दफ्तर में लगातार बैठ कर काम करना, फिर ऑफिस या पब्लिक ट्रांस्पोर्ट में बैठकर घर आना, डिनर करना और सो जाना ही हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है. अगले दिन फिर इसी दिनचर्या का अनुसरण करना होता है. यही जीवनशैली वर्षों तक चलती है, जिसका परिणाम कई तरह की बीमारियों और मानसिक तनाव में निकलता है. इसका प्रबंधन किया जाना चाहिए. काम के दबाव के बावजूद अपनी शारीरिक सेहत को संतुलित करके रखा जाना जरूरी है. एक सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. आनंद पाण्डेय बताते हैं कि लगातार एक ही पॉस्चर में बैठे-बैठे काम करना, और फिर अचानक भूख लगने या तलब लगने पर खूब सारा फास्ट फूड खा लेना मोटापे और हृदय रोग के खतरे को बढ़ा देता है.

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ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है. अकसर काम का हवाला देकर बहुत से युवा व्यायाम और अन्य शारीरिक गतिविधियों की जरूरत को नजरअंदाज करते हैं. सच्चाई यह है कि स्वस्थ शरीर के लिए खानपान के साथ-साथ व्यायाम का भी बहुत महत्व है. हल्का-फुल्का व्यायाम करते रहने से रक्तचाप सामान्य रहता है, शरीर से अतिरिक्त फैट निकलता है, इम्यूनिटी या रोग-प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है. ऐसे में यदि काम के अधिक तनाव से जूझ रहे हैं तो सावधानी जरूरी है.

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