Wednesday , 28 October 2020

आपरेशन के लिए दर-दर भटका मरीज, सरकार और अस्पताल पर 1.5 लाख का जुर्माना


दिल्ली सरकार (Government) बताए, मरीज का ऑपरेशन कितने वक्त में और किस अस्पताल में होगा

नई दिल्ली (New Delhi) . जरा सोचिए कि मरीज का ऑपरेशन होना हो, अस्पताल उसके सारे टेस्ट करा ले, ऑपरेशन की डेट भी दे दे और ऐन वक्त पर डॉक्टर (doctor) मरीज का ऑपरेशन करने से मना कर दे. और ऐसा एक बार नहीं, कई बार हो. ऑपरेशन न होने की सूरत (Surat) में मरीज की जान को खतरा हो, ऐसी स्थिति में मरीज की मानसिक स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है.

दिल्ली में 42 साल के एक मरीज की इन्हीं परेशानियों को देखकर दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान 50 हजार का जुर्माना दिल्ली सरकार (Government) पर और 1 लाख रुपये का जुर्माना भगवान महावीर अस्पताल पर लगा दिया. दिल्ली हाई कोर्ट ने डेढ़ लाख रुपए की ये रकम दिल्ली सरकार (Government) और महावीर अस्पताल को 1 हफ्ते के भीतर मरीज के खाते में जमा कराने के आदेश दिए हैं. हाई कोर्ट ने फटकार लगाते हुए दिल्ली सरकार (Government) को कहा कि वह एक हफ्ते में यह साफ करे कि मरीज का ऑपरेशन कितने वक्त में और किस अस्पताल में होगा.

जानकारी के मुताबिक पिछले साल नवंबर में एलएनजेपी अस्पताल में ऑपरेशन कर मरीज को स्टूल बैग लगाया गया था. दूसरा ऑपरेशन 26 मार्च को होना था. एलएनजेपी अस्पताल के कोविड अस्पताल में तब्दील कर दिए जाने के बाद मरीज को ऑपरेशन के लिए भगवान महावीर हॉस्पिटल पीतमपुरा में भेज दिया गया. 15 मई को ऑपरेशन की तारीख दी गई, लेकिन ओपीडी में डॉक्टर (doctor) ने ये कहकर ऑपरेशन करने से मना कर दिया कि मरीज को कोरोना है. मरीज में कोरोना के कोई लक्षण ही नहीं हैं कहते हुए सरकारी अस्पतालों ने मरीज को जीटीबी अस्पताल में रेफर कर दिया गया. 1 जून को जीटीबी अस्पताल ने कहा कि अब वो भी कोविड अस्पताल में तब्दील कर दिया गया है.

लिहाजा मरीज के आंत का ऑपरेशन यहां नहीं हो सकता. इसके बाद एलएनजेपी अस्पताल ने दोबारा मरीज को भगवान महावीर हॉस्पिटल के लिए रेफर कर दिया. महावीर हॉस्पिटल ने दोबारा मरीज के सारे टेस्ट कराए, लेकिन ऑपरेशन करने से फिर मना कर दिया. इस बार कहा गया कि ऑपरेशन करने के लिए अस्पताल के पास पूरी सुविधाएं नहीं हैं. मरीज ने हार कर दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. हाई कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली सरकार (Government) को नोटिस दिया और पूछा कि मरीज का इलाज किन अस्पतालों में हो सकता है. दिल्ली हाई कोर्ट 30 जुलाई को इस मामले में फिर सुनवाई करेगा.

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