फैशन से अधिक सुविधा और सुरक्षा पर ध्यान दें : उपराष्ट्रपति


नई दिल्ली (New Delhi) . उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने आज देश के आर्किटेक्ट्स से आग्रह किया कि वे स्थापत्य में हरित डिजाइन को अपनाएं और प्रोत्साहित करें. उन्होंने कहा की भविष्य में बनने वाले भवनों में सौर ऊर्जा जैसे अक्षय ऊर्जा स्रोतों को अपनाया जाना चाहिए. आज इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स के वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर, आभासी माध्यम से संबोधित करते हुए उप राष्ट्रपति ने बल दिया कि किसी इमारत के निर्माण में कलात्मकता और प्रकृति के प्रति उसकी अनुकूलता में संतुलन बनाया जाना चाहिए.

सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर कोणार्क के सूर्य मंदिर तथा उसके बाद आधुनिक काल तक, भारत के भवन निर्माण और स्थापत्य कला के विकास की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारे देश में ऐसी कितनी ही प्रख्यात इमारतें हैं जो स्थानीय कारीगरों द्वारा स्थानीय संसाधनों और तकनीक का उपयोग करके बनाई गई हैं. उन्होंने कहा स्थापत्य और इमारतें किसी भी सभ्यता के विकास का सबसे स्थाई पहचान होती है.

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उप राष्ट्रपति ने स्थापत्य विशेषज्ञों से आग्रह किया कि वह भारत की समृद्ध स्थापत्य विविधता से प्रेरणा लें, उसे संरक्षित करें और उसे आगे विकसित करें. उन्होंने कहा कि इस विधा के विशेषज्ञ उद्यमी प्रकृति-अनुकूल डिजाइन तथा तकनीक अपनाएं जो स्थानीय लोगों की जरूरत के मुताबिक हों. सरकार (Government) द्वारा चलाए जा रहे स्मार्ट सिटी तथा सबके लिए आवास कार्यक्रमों की सराहना करते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि इन कार्यक्रमों को स्थानीय शिल्प परंपराओं से जोड़ने की आवश्यकता है. उन्होंने इन कार्यक्रमों में स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों को भी जोड़ने पर बल दिया. इससे न केवल स्थानीय संस्कृति और स्थापत्य शैली जीवित रहेगी बल्कि प्रतिभाशाली स्थानीय कारीगरों को भी रोजगार मिलेगा जो अपनी कला के माध्यम से संस्कृति को जीवित रखने का अथक प्रयास कर रहे हैं.

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उन्होंने आर्किटेक्टस से आग्रह किया कि किसी भी प्रोजेक्ट को डिजाइन करते वक्त वे स्थानीय लोगों से भी सलाह मशविरा लें, जिससे कि नया प्रोजेक्ट स्थानीय जरूरतों के अनुरूप हो. उन्होंने आर्किटेक्टस से आग्रह किया कि वह भवन के लिए डिजाइन तैयार करते समय, सुविधा पर अधिक जोर दें. भवन का डिजाइन सुविधा और कलात्मकता एवम् फैशन का संतुलित मिश्रण हो. उन्होंने कहा कोई भवन सिर्फ आश्रय और सुरक्षा प्रधान करने के लिए ही नहीं बल्कि पर सुविधाजनक भी होना चाहिए.

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उप राष्ट्रपति ने कहा की उन्होंने देशभर के स्थानीय नगर निकायों को सलाह दी थी कि नए भवनों और इमारतों में छत पर सौर ऊर्जा पैनल तथा वर्षा जल संरक्षण के प्रावधान सुनिश्चित किए जाने चाहिए. बारिश के कारण शहरों में बाढ़ और जल जमाव जैसी समस्याओं की चर्चा करते हुए उप राष्ट्रपति ने प्रभावी जल निकासी तंत्र विकसित करने का आग्रह किया.

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