Monday , 28 September 2020

मेवाड़ अधिपति परमेश्वराजी महाराज श्री एकलिंगनाथ जी की श्रावण मास के साथ पार्थेश्वर पूजन सम्पूर्ण


उदयपुर (Udaipur). श्रावण मास के 5वें सुखिया सोमवार (Monday) और श्रावणी पूर्णिमा याने रक्षाबंधन के सुअवसर पर मेवाड़ अधिपति परमेश्वराजी महाराज श्री एकलिंगनाथ जी के अभिलेखीय चित्र को भक्तों के दर्शन हेतु महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन, उदयपुर (Udaipur) द्वारा दिया गया है.

श्रावण मास की चतुर्दशी पर होने वाली महापूजा आज पूर्णिमा पर सम्पन्न हो जाती है. फाउण्डेशन के महाराणा मेवाड़ अनुसंधान केन्द्र द्वारा बताया गया कि मेवाड़ के महाराणा भगवान शिव के उपासक रहे और मेवाड़ अधिपति श्री एकलिंगनाथ जी इष्टदेव. इसी कारण एकलिंगजी की सेवा-पूजा का विशेष महत्व है. भगवान एकलिंगनाथ मेवाड़ के स्वामी है और महाराणा उनके दीवान.

महापूजा के अवसर पर प्रतिवर्ष मंदिर में सवा लाख मिट्टी के शिवलिंग बनाकर पार्थेश्वर पूजन सम्पन्न किया जाता है. महापूजा के दौरान शिवलिंग पर सवालाख बिल्व पत्र चढ़ाये जाने का विधान है. पार्थेश्वर पूजन के बाद मिट्टी के शिवलिंगों को विसर्जन कर दिया जाता है. भगवान एकलिंगनाथ की रात 10बजे से विशेष सेवा-पूजा आरम्भ होती है.

पार्थेश्वर पूजन का महत्व रामायण में पढ़ा जा सकता है, भगवान राम ने रावण का संहार से पहले समुद्र तट पर अपने हाथों से शिवलिंग (रामेश्वरम नाम से विख्यात) का निर्माण कर पार्थेश्वर पूजन किया था. पार्थेश्वर पूजन हजारों यज्ञों और पूजाओं के बराबर माना जाता है तथा यह पूजन बहुत ही सरल और मनोवांछित फल प्रदान करने वाला माना जाता है. इसी तरह देवी पार्वती ने भी भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए वर्षों तक पार्थेश्वर पूजन किया था, उसी कारण से पार्थेश्वर पूजन को पार्वतेश्वर पूजन भी कहा जाता है.

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