नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा से चंद्रदोष से मिलती है मुक्ति

नई दिल्ली (New Delhi) . नवरात्रि का त्योहार से शुरू हो चुका है. नवरात्रि का पहला दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप को समर्पित होता है. पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री पुकारा जाता है. मां दुर्गा का यह स्वरूप बेहद शांत, सौम्य और प्रभावशाली है. घटस्थापना के साथ ही मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा की जाती है. मां शैलपुत्री के माथे पर अर्ध चंद्र स्थापित है. मां के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं में कमल है. उनकी सवारी नंदी माने जाते हैं. देवी सती ने पर्वतराज हिमालय के घर पुर्नजन्म लिया और वह फिर वह शैलपुत्री कहलाईं.

ऐसा माना जाता है कि मां शैलपुत्री की पूजा करने से चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है. नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा में सभी नदियों, तीर्थों और दिशाओं का आह्वान किया जाता है. पहले से लेकर आखिरी दिन तक नवरात्रि की पूजा में कपूर का इस्तेमाल बेहद शुभ माना गया है. कहते हैं कि मां दुर्गा की पूजा में कपूर के इस्तेमाल से उनकी विशेष कृपा भक्तों को प्राप्त होती है. मान्यता है कि मां शैलपुत्री को सफेद वस्तुएं प्रिय हैं. इसलिए नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप को सफेद मिष्ठान का भोग लगाया जाता है. इसके साथ ही उन्हें श्वेत पुष्प अर्पित करना भी बेहद शुभ माना जाता है.

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