Saturday , 26 September 2020

मेवाड़ी जाबांज ने फहराया था अयोध्या में पहला भगवा

राम जन्म स्थली अयोध्या में विवादित ढ़ांचे पर पहली बार भगवा ध्वज फहराने वाले साहसी कार सेवक मेवाड़ के सियाणा निवासी है. उस वक्त विवादित ढ़ांचे के शिखर से तोड़ा गया तांबे का हिस्सा आज भी इनके पास मौजूद है. अब मंदिर निर्माण की आधारशीला के मुहूर्त में कोरोना महामारी (Epidemic) के चलते शामिल नहीं हो पाने का इन्हें मलाल जरूर है, लेकिन मंदिर बनने के बाद शिखर पर स्वर्ण कलश चढ़ाने की इनकी कामना है, जो शायद अवश्य पूरी होगी.

राजसमंद जिले के सियाणा निवासी सेवानिवृत फौजी रामसिंह चुंडावत ने बताया कि अयोध्या में उस स्थल पर भगवान के दिव्य प्रभाव को स्वयं महसूस किया था और भगवद् पे्ररणा से ही करंट के कंटीले तारों से प्रवेश कर दिया. आश्चर्य है कि उस वक्त कुछ ही क्षणों के लिए बिजली का प्रवाह बंद हो गया था, जिसका इन्हें प्रवेश होने में फायदा मिला. फिर पास के बरगद के पेड़ की टहनी पकडक़र विवादित ढ़ांचे पर चढ़ गए और गुंबद के शिखर का हिस्सा तोडक़र अपने झोले में डाल दिया और दंड के सहारे भगवा ध्वज फहरा दिया. उसके बाद अंधाधुंध गोलियां चलने लगी और उनके सामने कई कार सेवक मारे गए, मगर वे खुद बचते बचाते हुए नीचे उतर कर भागने लगे, मगर पुलिस (Police) की लाठियों से वे चोटिल भी हो गए थे.

उन्होंने बताया कि मुझे तो तब से ही पूरा विश्वास था कि एक दिन इसी जगह राम मंदिर (Ram Temple) अवश्य बनेगा और अब वही सपना साकार हो रहा है. स्वयं को सौभाग्यशाली मानने वाले चुंडावत ने कहा कि शायद मुझे इसी कार्य के लिए भगवान ने 20 साल तक फौज की नौकरी दी थी, ताकि मैं इस महान कार्य के लिए स्वयं को तैयार कर सकूं. तभी तो उन्हें पुलिस (Police) की गोलियों और लाठियों से तनिक भी मौत का भय नहीं लगा.

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