जेएनयूः अब छात्रों ने सेमेस्टर परीक्षा का किया बायकॉट

नई दिल्ली (New Delhi) . दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) कैंपस में हॉस्टल फीस वृद्धि वापसी के मुद्दे पर छात्रों व विश्वविद्यालय प्रशासन की बैठक बेनतीजा समाप्त हो गई. जहां छात्र (student) फीस वृद्धि वापसी के बगैर आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं थे तो वहीं विवि प्रशासन ने सेमेस्टर परीक्षा में कोई बदलाव करने से इंकार कर दिया. इसके बाद छात्रों ने सेमेस्टर परीक्षा का बहिष्कार कर दिया.

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के दखल पर छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच डेढ़ महीने के बाद पहली बार बातचीत का रास्ता खुला था. मंत्रालय पिछले दो हफ्ते से छात्रों को मनाने में जुटा था. इसी का नतीजा था कि छात्र (student) कुलपति कार्यालय में बातचीत के लिए तैयार हुए. दिल्ली पुलिस (Police) के संयुक्त आयुक्त आनंद मोहन हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस (Police) बल के साथ बृहस्पतिवार को कुलपति कार्यालय पहुंचे ताकि छात्रों को वहां से हटाया जा सके. हाईकोर्ट ने कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार और रजिस्ट्रार प्रो. प्रमोद कुमार को सुरक्षा देने का निर्देश बुधवार (Wednesday) को दिल्ली पुलिस (Police) को दिया था. इसी बीच दोपहर को रजिस्ट्रार की ओर से छात्रसंघ समेत छात्रावास अध्यक्षों को शाम चार बजे बैठक के लिए बुलाया गया है.

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बेनतीजा रही बैठक

छात्रावास फीस बढ़ोतरी पर जारी आंदोलन और सेमेस्टर परीक्षा करवाने के मकसद से रजिस्ट्रार की ओर से बृहस्पतिवार को सभी छात्रावास अध्यक्षों को बैठक के लिए बुलाया गया. कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार ने छात्रों के भविष्य का हवाला देते हुए आंदोलन समाप्त करने की मांग रखी. इसी बीच डीन ऑफ स्टूडेंट ने कहा कि वह अदालत के निर्देश के तहत छात्रसंघ को मान्यता देंगे.

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छात्रावास फीस बढ़ोतरी पूरी तरह वापस लेने की मांग को कुलपति ने खारिज कर दिया. छात्रों ने स्कूल ऑफ लैंग्वेज, स्कूल ऑफ इंटरनेशनल लैंग्वेज, कंप्यूटर साइंस सेंटर के गेट पर ताला लगाकर धरना दिया. छात्रों ने तख्ती पर आंदोलन मांग के बगैर पूरा नहीं होगा का स्लोगम भी लिख रखे थे. वहीं स्कूल ऑफ संस्कृत और फिजिकल साइसेंज में सेमेस्टर परीक्षा हुई है और छात्र (student) सेमेस्टर परीक्षा देने पहुंचे. हालांकि स्कूल ऑफ फिजिकल साइंसेज में छात्रों की संख्या बेहद कम रही. जबकि अन्य स्कूल व सेंटर के बाहर आंदोलन व ताला लगा होने के चलते शिक्षक भी वापस लौट गए.

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