लादेन को शहीद कह कर कराची हमले की निंदा की उम्मीद करना गलत

-संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बयान को अमेरिका और जर्मनी ने दो बार रोका था

संयुक्त राष्ट्र . संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी सदस्य इस बात पर सहमत थे कि पाकिस्तान द्वारा एक ओर वैश्विक आतंकी (ओसामा बिन लादेन) को ‘शहीद’ कहना और दूसरी ओर आतंकी (कराची) घटना की साफतौर पर निंदा की उम्मीद करना, यह साथ-साथ नहीं चल सकता. सूत्रों ने बताया कि बयान जारी करने में देरी की वजह यह संदेश देना था कि ‘आपको इनमें से एक को छोड़ना होगा’. सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने कहा कि यह ‘‘संदेश उन तक पहुंच गया है’’ और इन चीजों को लेकर वह गैरजिम्मेदार नहीं हो सकते. सूत्रों के मुताबिक इससे पूर्व कराची में हाल में हुए आतंकी हमले की निंदा करने वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बयान को अमेरिका और जर्मनी ने दो बार रोका था क्योंकि वे पाकिस्तान द्वारा इस घटना के लिए भारत को दोष देने तथा प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा ओसामा बिन लादेन को ‘शहीद’ बताने के कारण पाकिस्तान को ‘संदेश’ देना चाहते थे.

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गौरतलब है कि पाकिस्तान के कराची में 29 जून 2020 को हुए आतंकी हमले की निंदा करने वाला बयान 15 सदस्यीय संरा सुरक्षा परिषद ने बुधवार (Wednesday) को जारी किया था. इस बयान का मसौदा पाकिस्तान के सहयोगी चीन ने तैयार किया था और इसे मौन प्रक्रिया के तहत लाया गया था, जिसमें यदि कोई सदस्य तय समयावधि के भीतर आपत्ति नहीं जताता है तो प्रस्ताव को स्वीकार्य मान लिया जाता है. सबसे पहले इस मौन प्रक्रिया को जर्मनी ने भंग किया, जिससे बयान जारी करने में विलंब हुआ. तब इसकी समयसीमा बढ़ाकर एक जुलाई सुबह दस बजे (स्थानीय समयानुसार) की गई. इसके बाद, दूसरी बार मौन प्रक्रिया को अमेरिका ने भंग किया जिससे बयान जारी करने में और भी विलंब हुआ. सूत्रों के मुताबिक यह विलंब पाकिस्तान को यह ‘‘संदेश’’ देने के लिए किया गया कि यह संभव नहीं है कि एक ओर वह अलकायदा के पूर्व प्रमुख और भयावह आतंकवादी हमलों को अंजाम देने वाले आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को ‘‘शहीद’’ कहे और कराची हमले में भारत का नाम घसीटें, वहीं दूसरी ओर अपने यहां हुए हमले के लिए स्पष्ट निंदा की उम्मीद करे.

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