Wednesday , 28 October 2020

बाबरी विध्वंस में आडवाणी ने खुद को बताया बेकसूर, कहा सियासी साजिश के तहत लगे आरोप


लखनऊ (Lucknow) . पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या (Ayodhya) में बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार कर दिया है. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए आडवाणी ने कहा कि उन्हें राजनीतिक कारणों से बेवजह इस प्रकरण में घसीटा गया. लखनऊ (Lucknow) में स्पेशल CBI जज एसके यादव के सामने खुद को बाबरी विध्वंस प्रकरण में पूरी तरह से बेगुनाह बताते हुए आडवाणी ने कहा राजनीतिक दबाव में उनके खिलाफ जांच की गई. उन्होंने कहा कि मनगढ़ंत सबूतों के आधार पर चार्जशीट दाखिल की गई है. इस दौरान आडवाणी से 100 से अधिक सवाल किए गए.

दिल्ली स्थित आवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए आडवाणी के सामने कुछ वीडियो क्लिप, अखबारों की कटिंग सहित अन्य सबूत रखे गए. भाजपा के वरिष्ठ नेता ने सभी को झूठा, मनगढ़ंत और राजनीतिक साजिश करार दिया. कोर्ट 4 जुलाई से ही सभी आरोपियों के बयान रेकॉर्ड कर रही है. इस मामले में भाजपा के कई नेता आरोपी हैं. आडवाणी से पहले यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह, मुरली मनोहर जोशी और भाजपा नेता उमा भारती के बयान दर्ज हो चुके हैं. सभी 32 आरोपियों का बयान दर्ज होने के बाद उन्हें अपनी सफाई और साक्ष्य पेश करने का मौका दिया जाएगा.

CBI की विशेष अदालत को इस मामले को 31 अगस्त तक निस्तारित करना है. बीते 8 मई को सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने CBI की विशेष अदालत को यह आदेश दिया था. गौरतलब है कि अयोध्या (Ayodhya) में 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों की भीड़ ने विवादित ढांचे को गिरा दिया था. उनकी आस्था थी कि किसी प्राचीन मंदिर को ढहाकर वह मस्जिद बनाई गई थी. लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी समेत तमाम भाजपा नेता उस वक्त राम मंदिर (Ram Temple) आंदोलन के प्रमुख नेता थे.

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