राजस्‍थान में अब शिक्षण सामग्री, ड्रेस पर स्कूल का नाम अंकित नहीं कर सकेंगे, अब पांच साल नहीं बदल पाएंगे ड्रेस

निजी स्कूलाें में पढ़ने वाले विद्यार्थियाें के लिए अच्छी खबर है. शिक्षा सत्र 2020-21 काे देखते हुए शिक्षा विभाग ने अधिकतर निजी स्कूलों की ओर से की जा रही माेटी कमाई पर नियंत्रण करना शुरू कर दिया है. सत्र शुरू हाेने से एक माह पहले ही प्रत्येक प्राइवेट स्कूल काे पाठ्य पुस्तकों की सूची सार्वजनिक करनी हाेगी.

अधिकारियों ने बताया कि विभाग की ओर से हर बार की तरह इस बार भी स्पष्ट अादेश हैं कि उनके लेखक, प्रकाशकों के नाम और कीमत सूचना पट्ट और शाला की वेबसाइट पर अाॅनलाइन जारी करनी हाेगी. निजी स्कूल संचालकों काे राजस्थान पाठ्य पुस्तक मंडल तथा सीबीएसई से संबद्धता रखने वाले स्कूल एनसीईआरटी की ओर से जारी पुस्तकें खरीदने के निर्देश विद्यार्थियों काे देने हाेंगे. इन पुस्तकों की सूचना उन्हें एक माह पहले स्कूल के सूचना पट्ट पर चस्पा करनी हाेगी ताकि अभिभावक खुले बाजार से पाठ्य पुस्तकें खरीद सकें.

 

पुस्तकों के साथ ही ड्रेस, टाई, जूते, बैल्ट और काॅपियां तक स्कूल में बेचने पर पाबंदी लगा दी है. निजी स्कूलों में विद्यार्थियों की यूनिफाॅर्म पांच साल तक बदली नहीं जा सकेगी. स्कूल हर साल-दाे साल में यूनिफाॅर्म में बदलाव करते हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक भार पड़ता है. अाम ताैर पर साप्ताहिक ड्रेस काेड बदलता रहता है. निजी स्कूलों की पाठ्य पुस्तकें और ड्रेस कम से कम पांच दुकानों पर उपलब्ध होना अनिवार्य है. यह शिकायत हर साल अाती है कि कुछ नामचीन स्कूलों की पाठ्य पुस्तकें उनके पास वाली बुक शाॅप पर ही मिलती हैं. उनकी कीमत भी मनमर्जी की वसूली जाती है. अधिकारियों के मुताबिक नया सत्र शुरू हाेने से पहले ही प्राइवेट स्कूल संचालकों काे एक बार और पाबंद किया जाएगा.

  शिक्षिकों को टिड्डी उड़ाने का काम सौंपा

इन निर्देशों की पालना नहीं करने वाले स्कूलों की क्रमोन्नति और सीबीएसई से संबद्धता निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी. हर साल नए शिक्षा सत्र में प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश के वक्त विद्यार्थियों की पाठ्य पुस्तकें और ड्रेस स्कूल से ही दी जाती हैं. स्कूल संचालक फीस के साथ उसकी राशि भी वसूल करते हैं. ऐसी शिकायतों को लेकर आदेश जारी किए.

  झुलसाती गर्मी से 24 घंटे तक राहत के आसार नहीं, आगे बढ़ा दक्षिण पश्चिम मानसून
Please share this news