पाक में कोरोना संकट से पैदा हुए हालात को संभालने में नाकाम रहे इमरान, फिर तख्तापलट की संभावना


नई दिल्ली (New Delhi) . पाकिस्तान में कोरोना का कहर प्रधानमंत्री इमरान खान के लिए मुसीबत का सबब बनता जा रहा है. कोरोना (Corona virus) संकट ने इमरान खान की सत्ता की कुर्सी को डगमगा दिया है, जिससे एक बार फिर पाकिस्तान में तख्तापलट की संभावना बढ़ गई है. सरकार (Government) कोरोना (Corona virus) को संभालने में पूरी तरह नाकामयाब रही है. इमरान ने कोरोना से जंग में एक बड़ा गैप बना दिया है, जिसकी वजह से सेना ने आगे आकर पीएम इमरान के फैसले को पलटते हुए देश में लाकडाउन लागू कर दिया.

दरअसल, पाकस्तान में कोरोना (Corona virus) से निपटने के प्रयासों में इमरान खान की विफलता ने पाकिस्तान आर्मी को उन पर हावी होने का मौका दे दिया है और अब सेना के सामने इमरान की एक भी नहीं चल पा रही है. बता दें कि पाकिस्तान में कोरोना (Corona virus) के मरीजों की संख्या 12500 हो गई है. दरअसल, उस वक्त इमरान खान की कुर्सी पर संकट के बादल और गहरा गए, जब इमरान खान के पाकिस्तान में लॉकडाउन (Lockdown) नहीं करने के फैसले को फौज ने पलट कर रख दिया था.

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22 मार्च को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश के नाम अपने संबोधन में देशव्यापी लॉकडाउन (Lockdown) न करने के कारणों को बताया था. इमरान खान ने कहा था कि ऐसा करने पर लाखों लोग अपनी नौकरी खो देंगे और उन परिवारों को और ज्यादा प्रभावित करेंगे, जो गरीबी रेखा से नीचे हैं, जो भूख मिटाने के लिए पर्याप्त भोजन पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. मगर महज 24 घंटे के भीतर ही पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल बाबर इफ्तिखार ने इमरान खान के फैसलों को पलटते हुए पाकिस्तान में लॉकडाउन (Lockdown) की घोषणा कर दी.

जैसे ही पाकिस्तान में लॉकडाउन (Lockdown) का ऐलान हो गया, पूरे देश में सेना की तैनाती कर दी गई और अब सेना राष्ट्रीय कोर समिति के माध्यम से कोविड-19 (Kovid-19) से निपटने के लिए उपायों पर दिशा-निर्देश जारी कर रही है. मीडिया (Media) रिपोर्ट में एक अनाम रिटायर्ड जनरल के हवाले से कहा गया है कि इमरान सरकार (Government) कोरोना (Corona virus) को संभालने में नाकामयाब रही है. इमरान खान ने कोरोना से जंग में एक बड़ा गैप बना दिया, यही वजह है कि सेना ने उस अंतर को भरने की कोशिश की है. इसके अलावा, कोई विकल्प नहीं था.

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कोरोना संकट ने एक बार फिर से पाकिस्तान में यह सवाल पैदा कर दिया है कि आखिर फैसले अब कौन ले रहा है, सेना या साल 2018 में सत्ता में आए इमरान खान. उल्लेखनीय है कि इमरान खान सेना के सहयोग से ही पाकिस्तान की सत्ता में आए थे. सैन्यबलों ने कोरोना (Corona virus) के इस संकट को एक अवसर के रूप में लिया है, जो इमरान खान की क्षमताओं पर सवाल खड़े कर रही है. इससे पहले इमरान खान के युवाओं को आगे आने और कोरोना रिलीफ टाइगर्स फोर्स में शामिल होने की अपील की थी, जिस पर उनका काफी मजाक उड़ा था.

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कोरोना (Corona virus) पर कुछ कारगर न कर पाना जनरलों की नजर में इमरान खान के लिए एक और नीतिगत विफलता है. इसके पहले, 67 वर्षीय क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान कश्मीर के मुद्दे पर भी विश्व समुदाय का ध्यान खिंचने में नाकाम रहे हैं और पाकिस्तान को आतंकी फंडिंग के लिए ‘ग्रे लिस्ट’ से निकालने में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) को समझाने में वह कामयाब नहीं हुए हैं.

विपक्षी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) की सांसद (Member of parliament) नफीसा शाह ने कहा आपातकाल में स्पष्ट निर्णय लेने जरूरी होते हैं. जब पूरी दुनिया मजबूत लॉकडाउन (Lockdown) की सलाह दे रही थी, तब उन्होंने इस पर अमल नहीं किया. उनकी इस गलती को बाद में सेना से सुधारा. प्रधानमंत्री के रुप में उन्हें लोकोपकारी निर्णय लेने होंगे. अगर वह नहीं लेंगे तो कोई दूसरा लेगा.

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