Sunday , 29 November 2020

शरद पूर्णिमा का है विशेष महत्व, किस प्रकार करें पूजा


हिंदू शास्त्र के अनुसार सभी पूर्णिमा में आश्विन मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है. इस पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं. इस बार 30 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा है. ऐसी मान्यता है कि इस रात को चंद्रमा अपनी पूरी सोलह कलाओं के प्रदर्शन करते हुए दिखाई देता है. शरद पूर्णिमा को कोजागरी या कोजागर पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात को माता लक्ष्मी स्वर्ग लोक से पृथ्वी पर आती हैं. इस रात महालक्ष्मी को जो भी व्यक्ति जागते हुए दिखाई देता है और जो व्यक्ति पूजा ध्यान में लगाए हुआ होता है उन्हें देवी लक्ष्मी की कृपा मिलती है.

किस प्रकार करें पूजा

शरद पूर्णिमा की रात में भगवान शिव को खीर का भोग लगाएं. खीर को पूर्णिमा वाली रात को छत पर रखें. भोग लगाने के बाद खीर का प्रसाद ग्रहण करें. इस उपाय से कभी भी पैसे की कमी नहीं रहेगी. शरद पूर्णिमा की रात में हनुमानजी के सामने चौमुखा दीपक जलाएं. इसके लिए आप मिट्टी का एक दीपक लें और उसमें तेल या घी भरें. मां लक्ष्मी को सुपारी बहुत पसंद है. सुपारी को पूजा में रखें. पूजा के बाद सुपारी पर लाल धागा लपेट कर उसका अक्षत, कुमकुम, पुष्प आदि से पूजन करके उसे तिजोरी में रखें, धन की कभी कमी नहीं होगी.

एक अध्ययन के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन औषधियों की स्पंदन क्षमता अधिक होती है. चांदनी रात में 10 से मध्यरात्रि 12 बजे के बीच घूमने वाले व्यक्ति को ऊर्जा प्राप्त होती है. सोमचक्र, नक्षत्रीय चक्र और आश्विन के त्रिकोण के कारण शरद ऋतु से ऊर्जा का संग्रह होता है और बसंत में निग्रह होता है.

अध्ययन के अनुसार दुग्ध में लैक्टिक अम्ल और अमृत तत्व होता है. यह तत्व किरणों से अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है. चावल में स्टार्च होने के कारण यह प्रक्रिया और आसान हो जाती है. इसी कारण ऋषि-मुनियों ने शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर खुले आसमान में रखने का विधान किया है.

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