दो बच्चों के बीच होना चाहिए कम से कम दो साल का फासला


लंदन . दो बच्चों के बीच कितना फासला होना चाहिए इसको लेकर महिलाओं में अक्सर संशय होता है. कई बार पहले बच्चे के जन्म के दूसरे दिन से ही घरवाले दूसरे बच्चे की बात करना शुरू कर देते हैं तो कई बार पैरंट्स सालों तक इस बारे में सोचते भी नहीं हैं. वैसे तो आपको दूसरा बच्चा चाहिए या नहीं, ये पूरी तरह से पैरंट्स का ही फैसला होता है. लेकिन बहुत से केसेज में महिलाएं जाने-अनजाने ही दूसरी बार प्रेग्नेंट हो जाती हैं. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि आखिर दो बच्चों के बीच कितना अंतर यानी एज गैप होना जरूरी है? कोई महिला जिसने अभी-अभी बच्चे को जन्म दिया है उसका शरीर दूसरी प्रेग्नेंसी के लिए फिर से कब रेडी हो सकता है? दोनों बच्चों की देखभाल, उन्हें मिलने वाला पोषण और मां के शरीर के लिहाज से दो बच्चों के बीच कितना अंतर होना चाहिए? अगर आपके मन में भी इस तरह के सवाल हैं तो यहां जानें, इन सभी का जवाब.

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महिलाएं 30 की उम्र में पहले बच्चे को जन्म देती हैं उनके पास इतनी आजादी नहीं होती कि वे अपने 2 बच्चों के बीच अच्छा खासा एज गैप रख पाएं क्योंकि उनके लिए उनकी बढ़ती उम्र फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न कर सकती है. ऐसे में स्वास्थ्य के लिहाज से देखें तो जब तक कोई महिला एक प्रेग्नेंसी और डिलिवरी से पूरी तरह से उबर नहीं जाती उसे दूसरे बच्चे के बारे में बिलकुल नहीं सोचना चाहिए. खासकर तब जब आपके शरीर में आयरन या हीमॉग्लोबिन की कमी हो. बहुत सी स्टडीज में यह बात साबित हो चुकी है कि अगर पहली डिलिवरी के 6 महीने के अंदर महिला दूसरी बार प्रेग्नेंट हो जाती है तो ऐसे बच्चे में जन्म के वक्त वजन कम होना, प्रीमच्योर डिलिवरी का खतरा जैसी आशंकाएं बढ़ जाती हैं.

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ऐसे में 2 प्रेग्नेंसी के बीच 18 से 23 महीने यानी डेढ़ से 2 साल के बीच का गैप होना बेहद जरूरी है. ऐसा इसलिए क्योंकि प्रेग्नेंसी और डिलिवरी के बाद महिला के शरीर को फिर से रिकवर होकर अपनी एनर्जी वापस पाने में इतना समय तो लग ही जाता है. इतना ही नहीं 2 बच्चों के बीच अंतर रखना इसलिए भी जरूरी है ताकि आप दोनों बच्चों को पूरी तरह से और बराबर ध्यान और तवज्जो दे पाएं. अगर 2 बच्चों के बीच उम्र का अंतर ज्यादा होगा तो आप दोनों बच्चे के शुरुआती सालों में उन पर पूरा ध्यान दे पाएंगे और साथ ही बच्चों पर होने वाले खर्च को भी अच्छी तरह से मैनेज कर पाएंगे.

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