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पहली बार महामारी से हारी खेल भावना, अब तक सिर्फ युद्ध की वजह से टालने पड़े ओलंपिक खेल


टोक्यो . कोरोना (Corona virus) के कारण इस साल 24 जुलाई से 9 अगस्त तक होने वाले टोक्यो की मेजबानी में होने वाले ओलिंपिक खेलों को अगले साल तक के लिए टाल दिया गया है. इससे पहले केवल दो बार ओलिंपिक खेल स्थगित किए गए. मॉस्को में 1980 में हुए ओलंपिक को राजनीतिक बहिष्कार और 1972 में म्युनिख ओलंपिक को आतंकवाद का सामना करना पड़ा, लेकिन यह वैश्विक खेल महाकुंभ केवल युद्ध के कारण ही अब तक रद्द हुए हैं. किसी महामारी की वजह से ओलंपिक खेलों का पहली बार आयोजन स्थगित करना पड़ा है.

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आइए देखते हैं कितनी बार स्थगित करने पड़े ओलंपिक खेल-

बर्लिन ओलंपिक 1912 : स्टॉकहोम में चार जुलाई 1912 को छठे ओलिंपिक खेलों की मेजबानी बर्लिन को सौंपी गई थी. जर्मन ओलिंपिक समिति ने युद्धस्तर पर तैयारी की. जून में बर्लिन स्टेडियम में टेस्ट स्पर्धाएं भी आयोजित हुईं. दूसरे दिन ऑस्ट्रिया के आर्कड्यूक फ्रेंक फर्डिनेंड और उनकी पत्नी की हत्या (Murder) कर दी गई. इसके बाद के घटनाक्रम प्रथम विश्व युद्ध का कारण बने. बर्लिन ओलंपिक खेल नहीं हो सके.

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टोक्यो 1940: जूडो के अविष्कारक जापान के महान खिलाड़ी जिगोरो कानो की अगुवाई में टोक्यो को 1940 में ओलिंपिक की मेजबानी मिली. इतालवी निर्देशक बेनितो मुसोलिनी ने ऐन मौके पर दौड़ से नाम वापिस ले लिया. इस बीच जापान और चीन में जंग छिड़ गई और राजनयिक दबाव बन गया कि जापान खेलों की मेजबानी छोड़ दे. आखिरकार जापान ने दबाव के आगे घुटने टेक दिए, लेकिन 1964 में टोक्यो ओलिंपिक की मेजबानी करने वाला पहला एशियाई देश बना.

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लंदन 1944 : लंदन ने रोम, डेट्राइट, लुसाने और एथेंस को पछाड़कर मेजबानी हासिल की लेकिन तीन महीने बाद ही ब्रिटेन ने जर्मनी के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया. ये खेल हुए ही नहीं और इटली में शीतकालीन खेल भी रद्द हो गए. लंदन ने 1948 में खेलों की मेजबानी की जिसमें जापान और जर्मनी ने भाग नहीं लिया.

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