दिल्ली हाईकोर्ट ने जेएनयू छात्र शरजील इमाम याचिका को दिया झटका


नई दिल्ली (New Delhi) . दिल्ली हाईकोर्ट ने जेएनयू छात्र (student) शरजील इमाम याचिका को खारिज कर दिया. शरजील ने बिना किसी नोटिस के यूएपीए मामले की जांच और चार्जशीट दायर के लिए जांच एजेंसी को और अधिक समय देने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी. शरजील ने अपनी याचिका में दावा किया था कि जांच एजेंसी ने कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन किया और डिफॉल्ट जमानत लेने का उनका अधिकार छीन लिया. शरजील इमाम को 2019 के जामिया में देशद्रोही भाषण देने और सीएए विरोधी दंगा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

जस्टिस वी. कामेश्वर राव की एकल पीठ ने इस मामले में शरजील इमाम को कोई राहत नहीं देने वाली याचिका को खारिज कर दिया. जस्टिस राव ने अपने आदेश में कहा मुझे लगता है कि जांच के विस्तार को मंजूरी देते समय अदालत ने एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के आवेदन और रिपोर्ट से उन कारणों व आधारों के बारे में खुद को संतुष्ट किया है जिनके आधार पर जांच करने के लिए और समय मांगा गया था. यह अदालत को सही लगत है और जांच बढ़ाने के लिए उचित आधार है.

शरजील इमाम की ओर से पैरवी करने वाली सीनियर वकील रेबेका जॉन ने तर्क दिया था कि ट्रायल कोर्ट के आदेश को अलग रखा जाना चाहिए क्योंकि अभियुक्त / आवेदक को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 43 डी के तहत आवेदन का नोटिस नहीं दिया गया था. वकील ने बताया कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 167 (2) (बी) के अनुसार आरोपी को बाद में रिमांड के लिए अदालत में पेश नहीं किया गया है, जबकि हर पंद्रह दिन बाद ऐसा करना जरूरी है. रेबेका ने कहा कि पुलिस (Police) द्वारा दिया गया आवेदन वास्तविक असल कारणों से रहित है, जिसमें 90 दिनों से अधिक समय तक विस्तार किए जाने की आवश्यकता है.

सीआरपीसी के तहत नियमों के अनुसार, चार्जशीट को अपराध के अनुसार 60/90 दिनों के भीतर दाखिल किया जाना चाहिए, हालांकि, यूएपीए मामलों के लिए, एजेंसियों को चार्जशीट दाखिल करने के लिए 180 दिन हैं. इमाम को दिल्ली पुलिस (Police) ने 28 जनवरी को बिहार (Bihar) से पिछले साल दिसंबर में जामिया मिलिया इस्लामिया क्षेत्र में एक देशद्रोही भाषण देने और दंगे भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया था.

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