महंगाई ने आम लोगों की बढ़ाई मुसीबत, RBI की राहत का असर नहीं


नई दिल्ली (New Delhi) . चालू वित्त वर्ष का आज यानी 31 मार्च को आखिरी दिन है. आर्थिक लिहाज से गौर करें तो इस साल आम लोगों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा. इसमें सबसे बड़ी दिक्कत महंगाई की रही है. महंगाई ने आम लोगों की कमर तोड़ दी. खासतौर पर प्याज और टमाटर के दाम काफी चर्चा में रहे. प्याज की कीमत ने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 200 रु प्रति किलोग्राम के आंकड़े को पार कर लिया तो वहीं टमाटर की भी बिक्री 120 रु किलोग्राम तक हुई थी.

कच्चे तेल के भाव ने पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए तो वहीं अन्य जरूरी खाने-पीने के सामान भी महंगे हो गए. वित्त वर्ष में महंगाई के आंकड़ों की बात करें तो म​हीने दर महीने आधार पर 6 साल के उच्चतम स्तर तक गया. खुदरा महंगाई 7 फीसदी से अधिक रही तो वहीं थोक महंगाई ने भी झटका दिया. बीते फरवरी महीने में रिजर्व बैंक (Bank) ऑफ़ इंडिया ने कहा था कि जनवरी से मार्च के बीच खुदरा महंगाई दर 6.5 फ़ीसदी तक रह सकती है. यह आरबीआई (Reserve Bank of India) की उम्मीदों से कहीं ज्यादा था.

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रिजर्व बैंक (Bank) की पूरी कोशिश होती है कि महंगाई दर 2 से 6 फ़ीसदी के बीच ही रहे. इस साल महंगाई को देखते हुए आरबीआई (Reserve Bank of India) ने इकोनॉमी को बूस्ट देने के लिए रेपो रेट में कटौती की. लेकिन इसका कुछ खास असर नहीं दिखा. वित्त वर्ष के पहले ही हफ्ते यानी अप्रैल 2019 में आरबीआई (Reserve Bank of India) ने मौद्रिक समीक्षा बैठक के बाद रेपो रेट में 25 बेसिस प्‍वाइंट की कटौती का ऐलान किया था. इस कटौती के बाद आरबीआई (Reserve Bank of India) की रेपो रेट 6.25% से घटकर 6% हो गई थी. इसके बाद लगातार 3 बार आरबीआई (Reserve Bank of India) ने रेपो रेट पर कैंची चलाई और यह दिसंबर 2019 में 5.15 फीसदी पर था.

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लेकिन दिसंबर और फरवरी की मौद्रिक समीक्षा बैठक में आरबीआई (Reserve Bank of India) ने रेपो रेट की इस दर को स्थिर रखा है. फिर आरबीआई (Reserve Bank of India) ने कोरोना (Corona virus) के प्रकोप को देखते हुए रेपो रेट में 75 बेसिस प्वाइंट की कटौती की बात कही है. ये आरबीआई (Reserve Bank of India) इतिहास की सबसे बड़ी रेपो रेट कटौती है. हालांकि ये कटौती नए वित्त वर्ष में लागू होगी. \आरबीआई (Reserve Bank of India) की बार-बार रेपो रेट कटौती के बाद भी बैंकों ने उम्‍मीद के मुताबिक ग्राहकों को फायदा नहीं पहुंचाया. इस वजह से आरबीआई (Reserve Bank of India) और सरकार (Government) की ओर से कई बार अपील भी की गई. इसके उलट बैंकों ने अपने मार्जिन (मुनाफे) में बढ़ोतरी की है.

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