कोरोना संकट से दोगुना होगा बैंकों का एनपीए


नई दिल्ली (New Delhi) . बैंकिंग सेक्टर का हाल पहले से ही काफी बुरा था, लेकिन कोरोना के कारण बैड लोन में भारी इजाफा होने की पूरी संभावना है, सरकार (Government) भी इस बात को भली भांति जानती है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आत्मनिर्भर भारत पैकेज की घोषणा के बाद बैंकों से लगातार कह रही हैं कि वे लोन बांटने में दिक्कत ना करें और याद रखें कि इसकी गारंटी सरकार (Government) दे रही है.

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सरकारी सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि बैंकों की माली हालत को देखते हुए इस सेक्टर में 20 अरब डॉलर (Dollar) (करीब 1.5 लाख करोड़ रुपए) डालने की जरूरत है. माना जा रहा है कि कोरोना महामारी (Epidemic) के कारण बैंकों पर बैड लोन का बोझ लगभग दोगुना (guna) होने वाला है. पहले सरकार (Government) 25 हजार करोड़ रुपए का स्पेशल बजट बैंक (Bank) री-कैपिटलाइजेशन के बारे में सोच रही थी. लेकिन कोरोना संकट इतना गंभीर है कि इसे अब काफी आगे बढ़ा दिया गया है. डिमांड में तेजी लाने के लिए रिजर्व बैंक (Bank) लगातार रीपो रेट घटा रहा है और लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए साथ ही साथ रिवर्स रीपो रेट में कटौती की जा रही है. वर्तमान हालात में बैंकों को फ्रेश फंड की सख्त जरूरत है.

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जीडीपी घटने का अनुमान

पूरे देश में करीब दो महीने से लॉकडाउन (Lockdown) की स्थिति है जिसके कारण अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है. लाखों लोग बेरोजगार भी हुए हैं. तमाम रेटिंग एजेंसियों का कहना है कि जीडीपी में 5 फीसदी या उससे ज्यादा तक की गिरावट आ सकती है.

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