व्यक्तित्व को लेकर सजग हुए भारतीय, युवाओं में बढ़ा स्माइल डिजाइनिंग का क्रेज


नई दिल्ली (New Delhi) . एजुकेशन पर माता-पिता के बढ़ते फोकस के कारण बच्चे अपनी किशोर वय तक यह तय कर लेते हैं कि उन्हें किस फील्ड में अपना करियर बनाना है. इसी को ध्यान में रखते हुए वे अपनी पर्सनल और मेंटल ग्रूमिंग पर फोकस करने लगते हैं. आज के युवा अपने व्यक्तित्व को बेहतर बनाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं. आज के युवा व्यक्तित्व को परफेक्ट बनाने के क्रम में बड़ी संख्या में डेंटिस्टों की सहायता लेने लगे हैं. डेंटिस्टों का कहना है कि उनके पास अपने दांतों की शेप, कलर और लुक्स को ठीक कराने आनेवाले पेशंट्स में सबसे अधिक संख्या 18 से 35 साल के युवाओं की है. एक समय था जब दंत चिकित्सकों के पास लोग सिर्फ दांतों का दर्द दूर करने, गैपिंग भरवाने या दांत निकलवाने ही जाया करते थे. अब बदले समय में मरीजों की मांगे भी बदल गई हैं. अब यंगस्टर्स स्माइल डिजाइन कराने पहुंच रहे हैं, दांतों को पर्फेक्ट शेप में लाने के लिए, मसूड़ों को गुलाबी दिखाने के लिए और ऐसी ही कई अलग-अलग फर्माइशों के साथ डेंडिस्ट के पास पहुंच रहे हैं.

करियर को ऊंचाई देने की चालत में युवा डेंटिस्ट्स के पास अब सिर्फ दांतों से जुड़ी समस्याओं के उपचार के लिए ही नहीं पहुंच रहे हैं, बल्कि स्माइल भी डिजाइन कराने लगे हैं. स्माइल डिजाइनिंग के बारे में डेंटिस्ट मनीषा चौधरी का कहना है कि यह प्रोग्राम न केवल युवाओं को आकर्षक दिखने में मदद करता है, बल्कि उनकी बढ़ती उम्र के असर को भी चेहरे पर झलकने से रोकता है. युवा चाहते हैं कि उनके दांत ही सफेद न दिखें बल्कि उनके मसूड़े भी पर्फेक्ट पिंक दिखने चाहिए. युवाओं की जरूरत और डिमांड को देखते हुए डेंटल हेल्थ एक्सपर्ट उनकी पूरी की पूरी स्माइल प्रोफाइल ही चेंज कर रहे हैं.

आज के समय में जिस तरह की जॉब प्रोफाइल बनाई जा रही है, उसमें यंगस्टर्स के ऊपर अट्रैक्टिव दिखने का प्रेशर भी बढ़ रहा है. इसलिए युवा अपने लुक्स को लेकर खासे सतर्क हो गए हैं. फैशन, एक्टिंग, हॉस्पिटैलिटी, इमिग्रेशन, मीडिया (Media) जैसे सभी सेक्टर्स में आकर्षक लुक्स को वरीयता दी जाती है. मेडिकल प्रफेशन की बात करें तो डॉक्टर्स के अपने ऊपर भी फिट और अट्रैक्टिव दिखने का प्रेशर होता है. चेहरे के आकर्षण के लिए जरूरी है कि हमारी मुस्कुराहट भी आकर्षक हो. किसी भी पेशंट की स्माइल डिजाइनिंग से पहले एक्सपर्ट्स उनके पुराने फोटो देखते हैं और पेशंट से उनकी जरूरत के अनुसार बात करते हैं. इसके आधार पर ही स्माइल डिजाइनिंग में उनकी जरूरत के हिसाब से कितना स्कोप है, यह बताते हैं. इसके बाद अगर जरूरत होती है तो सबसे पहले दांतों की ब्लीचिंग की जाती है, ताकि वे पहले की तुलना में अधिक साफ और क्लीन और वाइट दिख सकें.

स्माइल डिजाइनिंग के दौरान दांतों के बीच के गैप को भी फिल किया जाता है. इसके लिए इंडिरेक्ट विनियर्स टैक्नीक का उपयोग किया जाता है. यह दांतों पर की जानेवाली एक तरह की कैपिंग होती है, जो दांतो के बीच के महीन गैप को फिल करती है और लुक को पर्फेक्ट बनाती है. दिल्ली एनसीआर के कई क्षेत्रों में और साथ ही हरियाणा (Haryana) के कई इलाकों में पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है. इस कारण उस क्षेत्र के युवाओं के दांतों में आमतौर पर ब्राउन कलर के पैचेज की समस्या होती है, इसे डेंटल फ्लोरॉसिस्ट कहते हैं. डेंटिस्ट्स इन पैचेज को दूर करने के लिए इंडिरेक्ट विनियर्स और ब्लीचिंग टैक्नीक का यूज करते हैं.

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