रोजगार देने में पिछड़ी सरकारी योजनाएं


नई दिल्ली (New Delhi) . मोदी सरकार (Government) भले ही रोजगार के दावे करे, मगर सच यह है कि सरकारी योजनाएं रोजगार देने में पिछड़ रही हैं. सरकार (Government) द्वारा चलाई जा रहीं विभिन्न स्कीम्स से रोजगार सृजन होने में कमी आई है. कमी के आंकड़ों में पिछले सालों के मुकाबले गैप भी ज्यादा है. प्रमुख आंकड़े प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, दीनदयाल अंतोदय योजना के हैं.

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दोनों के जरिए सरकार (Government) रोजगार देने का काम करती है. लेकिन आंकड़े बताते हैं कि अब इसमें तेजी से गिरावट आई है. सरकार (Government) की कुछ रोजगार सृजन और प्लेसमेंट योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम और दीनदयाल अंतोदय योजना के ताजा आंकड़े इस तरफ इशारा करते हैं. ये आंकड़े सरकार (Government) ने ही संसद के सामने रखे हैं. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के आकंड़े 2014 में मोदी सरकार (Government) आने के बाद से अबतक सबसे कम हैं.

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दीन दयाल योजना की भी ऐसी ही स्थिति है. इसके तहत प्लेसमेंट पानेवालों की संख्या भी घटी है. 2018-19 में यह 1.8 लाख थी. इस वित्त वर्ष 27 जनवरी तक यह 44 हजार से कुछ ऊपर ही है. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनाए में भी 2019-20 में गिरावट है. 2018-19 में इसमें 26,796 नौकरियां उत्पन्न हुईं वहीं इस साल यह आंकड़ा 20 हजार ही पार कर पाया है. यह 2015-16 के बाद सबसे कम है.

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