फीस बढोत्तरी का विरोध, जेएनयू छात्रों को आईआईएमसी से सीखना चाहिए

नई दिल्ली (New Delhi) . दिल्ली के जेएनयू के छात्र (student) बीते दिनों फीस वृद्धि को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन करते दिख रहे थे. छात्र (student) फीस बढ़ाने के लिए प्रदर्शन करते रहे और जमकर बवाल भी काटा. लेकिन जेएनयू से महज कुछ ही दूरी पर स्थित आईआईएमसी में पिछले तीन सालों में फीस 50 फीसदी तक बढ़ा दी गई है. जिसको लेकर भी छात्र (student) प्रदर्शन कर रहे हैं.

आए दिन किसी न किसी जायज या नाजायज गतिविधि के कारण सुर्ख़ियों में रहने वाला देश के प्रसिद्ध विश्वविद्यालय जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र (student) बीते दिनों फीस वृद्धि को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन करते दिख रहे थे. जेएनयू में अचानक से हॉस्टल की फीस हजारों रुपए बढ़ा दी गई तो उन्होंने वीसी से कहा मत कीजिए, हम पढ़ नहीं पाएंगे. कोई सुनवाई नहीं हुई. नतीजा, वो संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन सड़कों पर उतर आए. इस मामले को लेकर प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस (Police) के बीच तीखी झड़प हुई. रक्षाबलों की भारी तैनाती के बावजूद उनहोंने चारों बैरिकेड तोड़ दिए.

  आयुष्मान कर रहे बुजुर्गो को जागरुक

सड़क की दुकान को छात्रों ने सभा में तब्दील कर दिया था. छात्रों के इस प्रदर्शन से दिल्ली की सड़के जाम रही और मेट्रो के भी कई स्टेशन बंद करने पड़े. लेकिन ये छात्र (student) फीस बढ़ाने के लिए प्रदर्शन करते रहे और संसद तक पहुंचने की जद्दोजहद में जमकर बवाल भी काटा. जिसका साक्षी दिल्ली के साथ मीडिया (Media) के जरिए पूरा देश भी बना. लेकिन जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से महज कुछ ही दूरी पर स्थित एक स्वायत्त संस्था है जहां पिछले तीन सालों में फीस तकरीबन 50 फीसदी तक बढ़ा दी गई है और जिसको लेकर छात्र (student) प्रदर्शन भी कर रहे हैं लेकिन देश-दिल्ली का ध्यान आर्कषित करने में नाकाम रहे, क्योंकि उनके प्रदर्शन में गुस्सा तो था लेकिन सांकेतिक आक्रामक नहीं. विरोध के स्वर में बगावत की बानगी नहीं.

  सैनिटाइजर बनाने की फैक्ट्री में लगी भीषण आग

अब आपको बताते हैं उस स्वायत्त संस्था के बारे में जिसका नाम है इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (आईआईएमसी). भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्था है. आईआईएमसी की स्थापना साल 1965 में हुई थी. संस्थान का उद्घाटन 17 अगस्त 1965 को तत्कालीन सूचना और प्रसारण मंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी ने किया था. आईआईएमसी में फीस साल दर साल बढ़ाई जा रही है. पिछले तीन सालों में ये फीस तकरीबन 50 फीसदी तक बढ़ा दी गई है. इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन (आईआईएमसी) के स्टूडेंट्स फीस बढ़ोतरी के मसले पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है.

Please share this news