एसिड अटैक पीड़िताओं को मुश्किल से मिलता है रोजगार, सोडेक्सो, लेमन ट्री ने बढ़ाया मदद का हाथ


कोलकाता (Kolkata) . बालीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की फिल्म छपाक के बाद से एसिड हमलों को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है, लेकिन इनसे जुड़ी एक सच्चाई यह भी है कि इन हमलों के पीड़ितों को रोजगार खोजने में मुश्किल का सामना करना पड़ता है. हालांकि, अब कुछ कंपनियां इन्हें हायर करने के लिए आगे आ रही हैं. सोडेक्सो और लेमन ट्री जैसी कंपनियों ने ऐसिड हमलों का सामना कर चुके लोगों को नौकरियां दी हैं.

शॉपर्स स्टॉप, सिलेक्ट सिटीवॉक और इटली की ऑटोमोटिव पार्ट्स कंपनी मैग्नेटी मेरेली ने इन हमलों के पीड़ितों को अपनी कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत मदद उपलब्ध कराई है. हालांकि ऐसे लोगों को रोजगार मिलना आसान नहीं है. कुछ एक्सपर्ट्स ने बताया कि ऐसिड हमले की पीड़ितों को दिव्यांग वर्ग में शामिल करने के कारण इन्हें हायर करने वाली कंपनियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन बहुत-सी कंपनियां अभी भी ऐसे लोगों को रखने में हिचकिचा रही हैं.

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सोडेक्सो इंडिया के एचआर डायरेक्टर प्रदीप चावडा ने बताया, ऐसे लोग बाहरी दुनिया से संपर्क करने से दूर रहते हैं, क्योंकि उन्हें नकारे जाने का डर होता है. इससे निपटने के लिए कंपनी ने एसिड हमले के पीड़ितों को कई डिविजन में नौकरी दी है. अन्य एंप्लॉयीज को भी इसके बारे में जागरूक किया जा रहा है. एसिड हमले का सामना कर चुकीं प्रज्ञा सिंह ने ऐसे लोगों के पुनर्वास में सहायता के लिए अतिजीवन फाउंडेशन बनाई है.

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प्रज्ञा एसिड हमलों के बारे में कंपनियों में जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करती हैं. उन्होंने बताया कि एंप्लॉयीज से कहा जाता है कि वे एसिड हमले के पीड़ितों से यह न पूछें कि उन्हें क्या हुआ है और कैसे हुआ है? नैशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के 2018 के आंकड़ों के अनुसार, एसिड हमलों के 228 मामलों की रिपोर्ट मिली थी. इन हमलों के पीड़ितों में लड़कियों या युवा महिलाओं की संख्या अधिक होती है और वे अकसर अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाती. इस वजह से भी इन्हें रोजगार खोजने में मुश्किल होती है.

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