अमेरिका में 3.3 करोड़ बेरोजगार भारत में 30 करोड बेरोजगार ?


नई दिल्ली (New Delhi) . कोविड-19 (Kovid-19) ने जिस तरह से भारत में आर्थिक विकास का पहिया रोक दिया है. उससे बड़े पैमाने पर बेरोजगारी बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है. बड़ी संख्या में जो मजदूर और कामगार काम करने के लिए अन्य राज्यों में या शहरों में गए हुए थे वह वापस अपने घरों में लौट रहे हैं. आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार भारत में आर्थिक गतिविधियां शुरू हो जाने के बाद भी लगभग 30 करोड लोगों के सामने बेरोजगारी का संकट पैदा हो गया है.

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है. अमेरिका की सरकार (Government) ने जो आंकड़े जारी किए हैं. उसमें अमेरिका जैसे विकसित राष्ट्र में 3 करोड़ 30 लाख लोग बेरोजगार हो चुके हैं. आर्थिक शोध एजेंसी मैकेंजी का मानना है. इस संपूर्ण लॉक डाउन में पहली वार ढील देने की अवधी 20 अप्रैल से 3 मई के बीच केवल 170 जिलों में 57 फ़ीसदी आर्थिक गतिविधियां शुरू हो पाई हैं. सीमित गतिविधियों के कारण करीब 55 फ़ीसदी आबादी 170 जिलों की जो लगभग 14 करोड़ 30 लाख की होती है. उनके पास कोई रोजगार नहीं था. रिपोर्ट के अनुसार 4 मई 2020 के बाद भारत सरकार (Government) ने लॉक डाउन में जो छूट दी है.

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उसके बाद भी 10 करोड़ 70 लाख लोग 170 जिलों में बेरोजगार हैं. लॉक डाउन खत्म होने और आर्थिक गतिविधियां शुरू होने के बाद रेलवे, एयरलाइंस, शॉपिंग मॉल, मनोरंजन से जुड़े हुए, सेवा क्षेत्र तथा निर्माण कार्यों से जुड़े हुए लगभग 30 करोड लोगों के बेरोजगार होने की संभावना आर्थिक विशेषज्ञ जता रहे हैं. जिस तरीके से 3 मई के बाद सारे देश में मजदूरों और कामगारों का पलायन हो रहा है. उसके बाद भारत में औद्योगिक एवं व्यवसायिक गतिविधियां शुरू होने में काफी लंबा समय लगने की बात कही जा रही है.

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आर्थिक शोध एजेंसी मैकेंजी ने अपनी रिपोर्ट में 6 करोड़ 70 लाख लोगों के रोजगार छिनने की बात कही है. असंगठित क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों को यदि इसमें जोड़ दिया जाए तो यह स्थिति बड़ी भयावह होगी मैकेंजी की रिपोर्ट में भारत सरकार (Government) को कहा गया है कि उसे जिलेवार तैयारी शुरू करनी होगी तब जाकर स्थिति का सही पता लगेगा कोरोना (Corona virus) के बाद जिस तरह की स्थिति बनी है. उसमें अब जिलेवार प्लानिंग की जरूरत है. अन्यथा भारत की स्थिति बड़ी भयावह हो सकती है.

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