Wednesday , 28 October 2020

CAA के विरोध प्रदर्शनों के दौरान मंगलुरु में हिंसा में लिप्त 21 आरोपियों को जमानत


नई दिल्ली (New Delhi) . सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान 19 दिसंबर को मंगलुरु में हिंसा में लिप्त 21 आरोपियों को जमानत दे दी है. इन आरोपियों को पहले ही 17 फरवरी को कर्नाटक (Karnataka) उच्च न्यायालय ने जमानत दे दी थी, लेकिन राज्य सरकार (Government) द्वारा दायर अपील पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने 6 मार्च को इस आदेश पर रोक लगा दी थी.

कोरोना के चलते व अन्य स्थिति बताते हुए दायर की गई अंतरिम जमानत की अर्जी पर मुख्य न्यायाधीश (judge) एसए बोबडे की पीठ ने सभी आरोपियों की रिहाई का आदेश दिया. पीठ ने कहा कि वह कर्नाटक (Karnataka) उच्च न्यायालय की इस टिप्पणी पर कुछ नहीं कह रही है कि घटनास्थल पर आरोपी व्यक्तियों की उपस्थिति का निर्धारण करना संभव नहीं है. अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी प्रत्येक वैकल्पिक सोमवार (Monday) को निकटतम पुलिस (Police) स्टेशन को रिपोर्ट करेंगे और वे यह सुनिश्चित करेंगे कि वे किसी भी हिंसक गतिविधियों / बैठकों में भाग न लें.

आरोपी व्यक्तियों ने कहा था कि वे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल थे, लेकिन पुलिस (Police) ने गोलीबारी का सहारा लिया जिससे दो व्यक्तियों की मौत हो गई. उन्होंने कहा कि वे 22 दिसंबर 2019 से सात महीने से अधिक समय तक हिरासत में रहे हैं. पुलिस (Police) ने कहा है कि उसने पहले ही चार्जशीट दायर कर दी थी और इसलिए उन्हें अब जांच की आवश्यकता नहीं है.

आरोप है कि 19 दिसम्बर को मोहम्मद आशिक सहित 21 लोगों ने CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान मंगलौर के थाने में आग लगा दी थी. इसके बाद सीसीटीवी के जरिए इन आरोपियों की पहचान कर इन्हें गिरफ्तार किया गया था. लेकिन हाई कोर्ट ने सबूतों के अभाव में जमानत दे दी थी.

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