भारत की अर्थव्यवस्था बचाने आरबीआई ने की 10 बड़ी घोषणाएं


मुंबई (Mumbai) . कोरोना (Corona virus) महामारी (Epidemic) की रोकथाम के लिए देश में लागू 21 दिन की पाबंदियों के आर्थिक व वित्तीय प्रभावों को कम करने के ‎लिए केंद्र सरकार (Government) के राहत पैकेज के एक ही दिन बाद शुक्रवार (Friday) को रिजर्व बैंक (Bank) ने भी मौद्रिक नीतियों से आर्थिक गति को सहारा देने की कोशिश की. रिजर्व बैंक (Bank) ने अप्रत्याशित कदम उठाते हुए तीन अप्रैल को प्रस्तावित मौद्रिक नीति घोषणा से पहले ही रेपो दर, रिवर्स रेपो दर घटाने समेत कई नीतिगत उपाय किए.

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रिजर्व बैंक (Bank) की घोषणा की मुख्य बातें इस प्रकार हैं-

– रेपो दर 0.75 प्रतिशत कर 4.4 प्रतिशत की गई.
– रिवर्स रेपो दर में 0.90 प्रतिशत की कमी की गई है.
– सीआरआर कम कर तीन प्रतिशत किया गया.
– रेपो दर में कमी से कोरोना (Corona virus) महामारी (Epidemic) के आर्थिक प्रभाव से निपटने में मदद मिलेगी.
– कच्चा तेल के दाम और मांग में कमी से खुदरा मुद्रास्फीति कम होगी
– मौद्रिक नीति समिति ने अनिश्चित आर्थिक माहौल को देखते हुए अगले साल के लिए आर्थिक वृद्धि दर, मुद्रास्फीति के बारे में अनुमान नहीं जताया.
– कद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 1 प्रतिशत की कटौती, सीआरआर 3 प्र‎तिशत पर आया.
-सीआरआर में कटौती, रेपो दर आधारित नीलामी समेत अन्य कदम से बैंकों के पास कर्ज देने के लिए अतिरिक्त 3.74 लाख करोड़ रुपए के बराबर अतिरिक्त नकद धन उपलब्ध होगा.
– आरबीआई (Reserve Bank of India) ने कर्ज देने वाले सभी वित्तीय संस्थानों को सावधिक कर्ज की किस्तों की वसूली पर तीन महीने तक टालने की छूट दी.
– कार्यशील पूंजी पर ब्याज भुगतान नहीं किए जाने को चूक नहीं माना जाएगा, इससे कर्जदार की रेटिंग पर असर नहीं पड़ेगा.

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