Saturday , 26 September 2020

‘हिंदुत्व’ के ‘रग- रग’ में बसे ‘श्रीराम’


अयोध्या और राम एक दूसरे के पूरक हैं. राम से अयोध्या है और अयोध्या श्रीराम का जीवन संस्कार है. हिंदू धर्म की पौराणिक मान्यता के अनुसार अयोध्या सप्त पुरियों मथुरा, माया, काशी, कांची, अवंतिका और द्वारका में शामिल है. श्रीराम की नगरी अयोध्या को अथर्ववेद में भगवान की नगरी कहा गया है. अयोध्या के शाब्दिक विश्लेषण से पता चलता है कि अ से ब्रह्मा, य से विष्णु और ध से रुद्र यानी त्रिदेव का स्वरूप है अयोध्या. जहाँ ब्रह्मा, विष्णु और शंकरजी स्वयं विराजमान हैं. अयोध्या के कण- कण में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम बसे हैं. इसे हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्म का मौलिक स्वरूप माना जाता है. सरयू नदी के पावन तट पर बसी है अयोध्या. इसकी स्थापना महाराज मनु ने की थीं. इसे साकेत के नाम से भी जाना जाता है.

सुप्रीमकोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में 05 अगस्त को भव्य राम मंदिर (Ram Temple) का निर्माण होने जा रहा है. जिसकी आधारशिला बुधवार (Wednesday) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रखेंगे. हालांकि इस मुहूर्त को लेकर काफी विवाद भी उठा है. जिस पर संत समाज विभाजित हैं. अयोध्या को दुल्हन की तरह सजाया गया है. सरयू नगरी इंद्रधनुष के रंग में रंग उठी है. पूरी अयोध्या चित्र शैली में रंग उठी है. अयोध्या से जिस तरह की तस्वीरें आ रहीं हैं, उससे यहीं लग रहा है कि जैसे भगवान विश्वकर्मा स्वयं अयोध्या उतर आए हैं. धर्मिक मान्यता के अनुसार जब महाराज मनु ने ब्रम्हा से अपने लिए एक नगर निर्माण की माँग कि, तो विष्णुजी ने उन्हें साकेत को सबसे उचित स्थान बताया. बाद में मनु के साथ भगवान विश्‍वकर्मा को भेजा गया. स्‍कंदपुराण के अनुसार अयोध्‍या भगवान विष्‍णु के चक्र पर विराजमान है. भगवान श्रीराम के बाद बाद लव ने श्रावस्ती को बसाया. कुश ने एक बार पुन: राजधानी अयोध्या का पुनर्निर्माण कराया.

श्रीराम विकारों से मुक्त उत्तम और मर्यादा पुरुषोत्तम हैं. इसी लिया उन्हें श्रेष्ठ मर्यादा का वाहक मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया है. वह धर्म, विवेक और आदर्श, के साथ मर्यादा और नैतिकता के प्रतीक हैं. वह मनवता के धर्मप्राण हैं. अहंकार और अविवेक रहित हैं. वह क्रोध, पाप से बिलग हैं. वह समदर्शी हैं. उन्होंने अपने निहित स्वार्थ के लिए धर्म की ध्वज को कभी गिरने नहीं दिया. न्याय और धर्म को हमेशा शीर्ष पर रखा. पिता महराज दशरथ और माँ कैकैई के वचनों के अनुपालन में राजसत्ता और वनवास को त्याग दिया. प्रजा के भावनाओं को उन्होंने हमेशा सम्मान किया. अयोध्या की प्रजा कि तरफ़ से आशंका उठने पर माँ सीता को वनवास भेज दिया. श्रीराम लोक मर्यादा को कहीँ से भी भंग नहीं होने दिया. यहीं वजह रहीं कि वह लोकरंजक कहलाए. उन्हें प्रजारंजक कहा गया. राज्य विस्तार को उन्होंने सिरे से खारिज किया. लंका को जीत कर विभीषण का राजतिलक किया. बालि के कुकर्मों का अंतकर सुग्रीव को राजा बनाया तो अंगद को युवराज. राक्षसों को वध कर दण्डकारण्य ऋषियों और मुनियों को दिया.

श्रीराम हिंदुत्व के ध्वजवाहक हैं. वह धर्म हैं, संस्कार हैं. संस्कृति हैं. श्रीराम हिंदुत्व के राग, रंग और संस्कार हैं.वह मानववता के आधार स्तम्भ हैं. उनका अवतार ही इस धरा पर धर्म के अवतार के रूप में हुआ. मानवता के कल्याण और समाज के आदर्शवाद के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन लोक कल्याण के लिए समर्पित कर दिया. उन्होंने हमेशा अयोध्या में धर्म को राज्य के नीति में शामिल किया. लेकिन धरती पर अवतरण के बाद वह ख़ुद राजनीति का शिकार हो गए. 500 सालों तक वह विवादों में उलझे रहे. ख़ुद के लिए रामलला को अदालत में अपना पक्ष रखना पड़ा. त्रेता में 14 सालों तक वनवास झेला. लेकिन कलयुग में उन्हें 28 सालों तक वनवास काल को अस्थाई टेंट में गुजारना पड़ा. राम को राजनीति का आधार बनाने वाले आलीशान बंगलों में गुजारा जबकि हमारे प्रभु टेंट में विराजमान होकर भक्तो के लिए स्वयं राजनीति की भेंट चढ़ गए. राम को आगे रख कर 500 सालों तक ख़ून- ख़राबा करने वाले लोग अपनी सियासी रोटी सेंकते रहे लेकिन प्रभु न्याय के लिए जीर्ण मंदिर और टेंट में अपने मालिकाना हक कि लड़ाई लड़ी और आख़िरकार विजयी हुए. श्रीराम की इस लड़ाई में किसी का जस और निहोरा नहीं है. उन्होंने यह लड़ाई मर्यादा में रह कर जीता है. तक़रीबन तीन दशक बाद उन्हें अपना घर मिलने जा रहा है. तभी तो इस ख़ुशी में अयोध्या सतरंगी हो चली है.

श्रीराम की अयोध्या रघुवंशी राजाओं की बेहद प्राचीन राजधानी थी. यह यह कौशल की राजधानी थी. वाल्मीकि रामायण में अयोध्या 12 योजन लम्बी और 3 योजन चौड़ी बताई गई है. आईन-ए-अकबरी के अनुसार अयोध्या कि लंबाई 148 कोस तथा चौड़ाई 32 कोस मानी गई है. ‘कोसल नाम मुदित: स्फीतो जनपदो महान. निविष्ट: सरयूतीरे प्रभूतधनधान्यवान्’ का उल्लेख है. अयोध्या के दर्शनीय स्थलों में हनुमान गढ़ी, रामदरबार, सीतामहल, राम की पैड़ी, गुप्त द्वार घाट, कैकेयी घाट, कौशल्या घाट, पापमोचन घाट, लक्ष्मण जैसे प्रमुख स्थल हैं. भगवान राम का जन्म चैत्र मास की नवमी को रामनवमी के रूप में मनाया जाता है. कहते हैं कि 1528 में बाबर के सेनापति मीरबकी ने अयोध्या में राम जन्मभूमि पर स्थित मंदिर तोड़कर बाबरी मस्जिद बनवाई. अयोध्या का का शाब्दिक अर्थ है जहाँ कभी युध्द न हुआ हो अर्थात अ-युध्य अथार्थ ‘जहां कभी युद्ध नहीं होता.

श्रीराम जन्मभूमि को लेकर 500 सालों तक विवाद चला. 1528 में बाबर के सेनापति मीरबाकि की तरफ़ से मंदिर को तोड़कर मस्जिद बना दी गई और उसे बाबरी मस्जिद का नाम दे दिया गया. जिसके बाद से हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग उस पर दावा ठोंकते रहे. इस दौरान अनगिनत रक्तपात हुए. लाखों लोगों की जान गई. 1990 में राममंदिर आंदोलन चरम पर पहुँच गया जब भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने रथयात्रा निकाली. मुलायम सिंह ने रामभक्तों पर गोलियां चलवाई. कहा जाता है उस समय सरयू जल भक्तों के ख़ून से लाल हो गया था. 1992 में कल्याण सिंह के ज़माने में विवादित ढाँचा कारसेवा के ज़रिए गिरा दिया गया. उस दौरान केन्द्र में काँग्रेस की सरकार (Government) थीं और प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव थे. अयोध्या विवाद के हल करने के लिए इन 20 सालों में काफी पहल हुई लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला. यह मुद्दा सियासी दलों के लिए वोट बैंक (Bank) बन गया. 1986 में राम मंदिर (Ram Temple) का ताला खुलवाने के बाद भी तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी भी इसी राजनीति कि वजह से कुछ नहीं कर पाए. हिंदुत्व के परख समर्थ बालासाहब ठाकरे भी इस आंदोलन में अपनी अहम भूमिका निभाई.

सुप्रीमकोर्ट में अंततः रामलला की जीत हुई और भव्य राम मंदिर (Ram Temple) का मार्ग प्रशस्त हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसी राम मंदिर (Ram Temple) की 05 अगस्त को आधारशिला रखने जा रहें हैं. हालांकि यह कार्यक्रम कोरोना संक्रमण कि वजह से बेहद सीमित दायरे में होगा. श्रीराम लला ट्रस्ट ने सीमित लोगों को ही आमंत्रित किया है. मुख्यमंत्री (Chief Minister) योगी आदित्यनाथ की निगरानी में पूरी अयोध्या को त्रेतायुग का लुक दिया गया है. आधुनिक विद्युत झालरें और पेंटिग कि वजह से अयोध्या में दिपावली का नजारा है. कल पूरी अयोध्या के साथ देश में दीपावली मनाई जाएगी. सनातन धर्म और संस्कृति के लिए यह गर्व का दिन है. क्योंकि श्रीराम का वनवास लंबे इंतजार के बाद ख़त्म हो रहा है. अब वक्त आ गया जब इस विवाद का खात्मा हो चाहिए. अब राम को राम ही रहने दिया जाय. सत्ता के लिए उन्हें राजनीति का राम न बनाया जाय.

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