ल्यूकेमिया से पीड़ित छात्रा ने अस्पताल से दी ज्यामिति की परीक्षा


मुंबई (Mumbai) . मन के हारे हार है, मन के हारे जीत’ इसी कहावत को चरितार्थ कर ल्यूकेमिया से पीड़ित बांद्रा की स्कूली छात्रा ने अस्पताल के बेड से ही बोर्ड की परीक्षा दी. छात्रा को परीक्षा से पहले टाटा मेमोरियल अस्पताल में भर्ती किया गया था, लेकिन वह पेपर के लिए उपस्थित होना चाहती थी. दरअसल कैंसर रोगी, छात्रा ने अपने अतिरिक्त समय और घर के करीब एक केंद्र की अनुमति देने के लिए राज्य बोर्ड के मुंबई (Mumbai) मंडल में आवेदन किया था.

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वह माहिम के अपने परीक्षा केंद्र से पहली 4 परीक्षाओं में शामिल हुईं. हालांकि, केंद्र ने बोर्ड को पत्र लिखकर मांग की कि उस अस्पताल से अपनी ज्यामिति परीक्षा देने की अनुमति दे. स्कूल की प्रधानाध्यापिका सिस्टर रूथ ने कहा, छात्रा अस्पताल में होने के बावजूद परीक्षा देना चाहती थी. वह वास्तव में दृढ़ थी. इसके बाद विशेष अनुमति के लिए बोर्ड से संपर्क किया और सारी प्रक्रियाओं का पालन किया. बोर्ड के अधिकारियों ने कहा कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए तेजी से आगे बढ़े कि छात्रा सुबह 11 बजे परीक्षा दे सकती है.

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राज्य बोर्ड के मुंबई (Mumbai) मंडल के सचिव संदीप सांगवे ने कहा, हमें सुबह 10 बजे अनुरोध प्राप्त हुआ और हम ये सुनिश्चित करना चाहते थे कि वह अपना मौका नहीं जाने दे. हमारे द्वारा एक महिला पर्यवेक्षक, एक पुलिस (Police)कर्मी और एक महिला लेखक को एक प्रश्न पत्र बंडल के साथ भेजा. सभी नियमों का पालन किया गया. हमें खुशी है कि वह परीक्षा दे सकी. हम आगामी परीक्षाओं के लिए भी समर्थन प्रदान करना जारी रखने वाले है. अस्पताल ने छात्र (student) को परीक्षा के लिए एक कमरा भी प्रदान किया. अस्पताल में जनसंपर्क के प्रमुख हुमायूं जाफरी ने कहा, ‘अस्पताल के लिए ये चीज नई थी, लेकिन इस परीक्षा के लिए तैयार किया गया था, क्योंकि हम मदद करना चाहते थे.’

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