Monday , 28 September 2020

भारत को धर्मनिरपेक्षता जैसी पश्चिमी अवधारणाओं की आवश्यकता नहीं, गोविंदाचार्य बोले, राम मंदिर भूमिपूजन 500 वर्षों के संघर्ष का परिणाम है


नई दिल्ली (New Delhi)(नई दिल्ली (New Delhi)). संघ परिवार के प्रतिष्ठित विचारक और भाजपा के पूर्व महासचिव केएन गोविंदाचार्य का कहना है कि भारत को धर्मनिरपेक्षता जैसी पश्चिमी अवधारणाओं की आवश्यकता नहीं है. भगवा पार्टी के साथ नाता तोड़ लेने वाले गोविंदाचार्य ने कहा, राम मंदिर (Ram Temple) भूमिपूजन 500 वर्षों के संघर्ष का परिणाम है. जिसकी सुखद परिणति हम इस भूमि पूजन के माध्यम से देखेंगे. यह सभ्यतागत पहलू बहुत अहम है क्योंकि लगभग 500 साल पहले उपनिवेशवाद या प्रोटेस्टेंटवाद शुरू हुआ था. इसके कारण हम खून में सने एक यूरोप केंद्रित समृद्धि के साक्षी बने हैं.

तो इसलिए, यह भूमि पूजन हमारे अपने सभ्यता की प्रगति में एक महत्वपूर्ण तारीख है. गोविंदाचार्य ने कहा, पश्चिम में एक मानव विकास संबंधी अवधारणा है, जिसने दो विश्व युद्ध और असमानता पैदा की. जहां 500 साल का और आगे का हमारा प्रयास रामराज्य के लिए है. यह गांधीजी के हिंद स्वराज के अलावा और कुछ नहीं है, जो पारिस्थितिकी विकास है. यह आत्मनिर्भर होने की अवधारणा है, समानता आधारित समृद्धि जो महंगाई पर नहीं बल्कि संतोष पर आधारित है. रामराज्य में उत्पादों के लिए मूल्य नहीं होगा, लेकिन उस उत्पाद को बनाने के लिए कौशल की सराहना की जाएगी.

उन्होंने कहा, इतने लंबे समय के बाद, हिंदुत्व को प्रमुख स्थान मिल रहा है. स्वाभाविक रूप से, इसे स्वीकार किया जा रहा है. जब सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) का फैसला (राम मंदिर (Ram Temple) पर) आया, तो पूरे देश ने इसे खुले दिल से स्वीकार किया. उन्होंने कहा, भारत के लिए धर्मनिरपेक्षता की आवश्यकता नहीं है. भारत की उपासना की सभी पद्धतियों के प्रति सम्मान की अपनी अवधारणा है. इसके बजाय, धर्मनिरपेक्षता का विचार पश्चिम से उधार लिया गया है. पश्चिम का अपना सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष था जिसके बीच धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा को लाया गया था. इसका भारत के इतिहास या भूगोल से कोई लेना-देना नहीं है.

गोविंदाचार्य ने कहा कि यह सभ्यता का दावा है जो आज जीता है, जिसमें लाखों ‘स्वयंसेवकों’ और ‘कार सेवकों’ ने अशोक सिंघल के नेतृत्व में आंदोलन के दौरान अपना जीवन दांव पर लगा दिया. यह किसी एक वर्ग, संगठन या 1 या 10 नेताओं की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की सामूहिक जीत है. उन्होंने कहा कि इस बात का बहुत ध्यान रखा जाना चाहिए कि यह लोगों के हाथों में रहे और यह सरकारी विभाग न बने. गोविंदाचार्य ने कहा कि इस मुद्दे पर, पूर्ण राष्ट्रीय सहमति होनी चाहिए. कोई भी विवाद मददगार नहीं होगा.

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