Wednesday , 28 October 2020

बीएमसी की लैब्स का निष्कर्ष, 60-65 प्रतिशत एंटीजन टेस्ट ने गलत निगेटिव रिजल्ट दिखाए


मुंबई (Mumbai) . मुंबई (Mumbai) महानगर की दो नागरिक लैब्स के निष्कर्षों से पता चलता है कि एंटीजन टेस्ट शायद अधिक कारगर नहीं हो सकते, क्योंकि जो सिम्पटोमेटिक (लक्षण वाले) मरीज एंटीजन टेस्ट में कोविड-19 (Covid-19) के लिए निगेटिव आए, उनमें आधे से अधिक का बाद में आरटी-पीसीआर टेस्ट में रिजल्ट पॉजिटिव आया. मुंबई (Mumbai) में रैपिड एंटीजन टेस्ट में गलत निगेटिव रिजल्ट आने की ऊंची दर इनकी प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठाती है.ये टेस्ट किट्स बृहन्नमुंबई (Mumbai) म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की ओर से सभी के लिए टेस्टिंग वाले ‘मिशन यूनिवर्सल टेस्टिंग’ के तहत इस्तेमाल की जा रही हैं.

डेटा से पता चलता है कि रियल-टाइम पोलीमरेज चेन रिएक्शन टेस्ट अभी भी कोविड के लिए गोल्ड स्टैंडर्ड टेस्ट है. एंटीजन टेस्ट में निगेटिव आने वाले 538 सिम्पटोमेटिक मरीजों का दोबारा आरटी-पीसीआर टेस्ट कराया गया,तब उनमें से 60 प्रतिशत पॉजिटिव निकले. इसी तरह एक अन्य अस्पताल में, 43 मरीजों में से 65 प्रतिशत ने इसतरह दोबारा आरटी-पीसीआर टेस्ट में पॉजिटिव रिजल्ट दिखाया.

जुलाई के बाद से बीएमसी ने लगभग 8872 एंटीजन टेस्ट किए हैं, जिसमें 1152 पॉजिटिव निकले. जो सिम्पटोमेटिक मरीज निगेटिव थे, उनका फिर से टेस्ट किया गया और बाद में उनमें से 60-65 प्रतिशत पॉजिटिव निकले.डॉ जयंती शास्त्री ने कहा, “सिम्पटोमेटिक मरीजों में गलत निगेटिव के ऊंचे प्रतिशत का कारण एंटीजन टेस्ट की संवेदनशीलता है. क्योंकि किट लिटरेचर के अनुसार एंटीजन टेस्ट की संवेदनशीलता 50 प्रतिशत है, लेकिन विशिष्टता 100 प्रतिशत है.

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च प्रोटोकॉल के मुताबिक यदि सिम्पटोमेटिक मरीज एंटीजन टेस्ट में निगेटिव रिजल्ट दे रहा है, तो पुष्टि के लिए उसका दोबारा आरटी-पीसीआर टेस्ट होना चाहिए. जो मरीज एसिम्पटोमेटिक (बिना लक्षण वाले) हैं उन्हें आरटी-पीसीआर टेस्ट से पहले कुछ दिनों के लिए निगरानी में रखा जाना चाहिए.

Please share this news