बालिका छात्रावास में रुका वार्डन का पति तो जांच के लिए पहुंची टीम

चित्तौड़गढ़, 24 जुलाई (उदयपुर (Udaipur) किरण). घर से दूर रहने वाली गरीब तबके की छात्राओं को शिक्षा के लिए सरकार (Government) की ओर से आवासीय छात्रावास संचालित है. इनमें बालिकाओं के रहने के साथ ही शिक्षा एवं सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है, लेकिन चित्तौड़गढ़ जिले में संचालित किए जा रहे कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में बालिकाओं की सुरक्षा में लापरवाही का मामला सामने आया है. वार्डन का पति रात को छात्रावास में रात रुका, जिसकी शिकायत होने पर शिक्षा विभाग की टीम जांच के लिए मौके पर पहुंची है.

यह मामला चित्तौड़गढ़ जिले में निम्बाहेड़ा उपखंड के बरड़ा स्थित कस्तूरबा आवासीय विद्यालय का है. कस्तूरबा आवत्रावास में पुरुषों का प्रवेश पूर्णतया वर्जित है. इनमें छात्रावास में बालिकाएं रहती है और उनके अध्ययन और आवास का पूरा खर्चा राज्य सरकार (Government) (State government) वहन करती है. राज्य सरकार (Government) (State government) के सर्व शिक्षा के माध्यम से इन छात्रावास का संचालन होता है. इनमें सुरक्षा को पहली प्राथमिकता बताई गई है लेकिन इस मामले ने बालिका शिक्षा को लेकर किए जा रहे सरकार (Government) के प्रयासों की पोल खोल दी है. जानकारी के अनुसार बरडा कस्तूरबा आवासीय विद्यालय की वार्डन परवीन बानू का पति सोमवार (Monday) रात इस विद्यालय के परिसर में रुका था. इसकी किसी ने शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को शिकायत कर दी.

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इस पर विभाग ने टीम का गठन किया, जिसमें एपीसी गजराजसिंह, बालिका शिक्षा प्रभारी पुष्पा सारस्वत, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी गोवर्धनसिंह, प्रधानाध्यापिका रेणु थे, जो जांच के लिए आवासीय छात्रावास पहुंचे. टीम की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि गत रात वार्डन का पति अखलाक हुसैन मंसूरी विद्यालय में रुका था. इस संदर्भ में जांच दल ने मौका रिपोर्ट बनाई है. यह रिपोर्ट जिले के आला अधिकारियों को सौंपी जाएगी, जिसके बाद कार्यवाही की बात कही जा रही है. सूत्रों की मानें तो वार्डन का पति गत तीन दिनों से विद्यालय में लगातार आ रहा था, जो बालिकाओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल है. गौरतलब है कि पूर्व में बेगूं के आवासीय विद्यालय में पढऩे वाली एक बालिका के गर्भवती होने का मामला भी प्रकाश में आया था.

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चौकीदार की मिली भगत की आशंका: सुरक्षा के नाम पर आवासीय विद्यालयों में चौकीदारों की भी व्यवस्था की गई है, जिससे की बालिकाओं की सुरक्षा को पुख्ता किया जा सके, लेकिन इस मामले में चौकीदारी के कार्य की भी पोल खोल दी है. जानकारों का कहना है कि विद्यालय में कार्यरत चौकीदारों को ये निर्देश हैं कि किसी भी प्रकार की अनियमितता की सूचना सीधे विभाग के आला अधिकारियों को दी जाए, लेकिन इस मामले में लगातार तीन दिन तक विभाग से संबंध नहीं रखने वाले एक पुरुष के विद्यालय में प्रवेश के बारे में सूचना नहीं दिया जाना मिलीभगत को दर्शाता है.

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सीडब्ल्यूसी ने शुरू की जांच: आवासीय विद्यालय में विभाग से संबंध नहीं रखने वाले व्यक्ति के रात में रुकने की सूचना मिलने पर बाल कल्याण समिति ने भी पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है. मामला संज्ञान में आने पर बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष डॉ. सुशीला लढ्ढा और समिति सदस्य विद्यालय पहुंचे. यहां उन्होंने बालिकाओं से बात कर पूरे मामले की जांच की. सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक राजेन्द्र शर्मा ने बताया कि किसी ने पुरुष के आवासीय विद्यालय में रात रुकने की सूचना दी थी. इस पर जांच दल मौके पर भेजा गया है. तथ्यात्मक रिपोर्ट सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी को रिपोर्ट भेज नियमानुसार कार्रवाई होगी.

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