निर्भया के दोषियों सात साल में जेल में कमाए 1, 37, 000 रुपए, परिजनों को मिलेगी रकम


नई दिल्ली (New Delhi) . निर्भया के दोषियों को शुक्रवार (Friday) सुबह 5.30 पर फांसी दे गई है. सात साल जेल में रहने के दौरान काम के बदले मिले पारिश्रमिक और उनके कपड़े आदि को अब निर्भया के चारों दोषियों के परिजनों को दे दिया जाएगा. निर्भया के दोषियों में से सबसे ज्यादा अक्षय ठाकुर को अधिकतम 69,000 रुपए पारिश्रमिक मिला है.

विनय शर्मा ने 39,000 रुपए और पवन गुप्ता ने 29,000 रु की कमाई की है. जबकि चौथे दोषी मुकेश सिंह ने कोई श्रम करना नहीं चुना. जेल में सज़ा काटने के दौरान मुकेश, पवन और अक्षय ने 2016 में कक्षा 10 वीं क्लास पास करने के लिए एडमिशन लिया था, इन्होंने परीक्षा भी दी थी, लेकिन वे पास नहीं हो सके थे. 2015 में, विनय ने एक वर्ष के स्नातक कार्यक्रम में प्रवेश लिया था, लेकिन वह कोर्स पूरा नहीं कर पाया.

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तिहाड़ जेल के सूत्रों से पता चला है कि निर्भया केस के सभी दोषियों में जेल के नियम तोड़ने की वजह से अक्षय को एक बार सजा मिली है, मुकेश को नियम तोड़ने पर 3 बार जबकि पवन को आठ बार और सबसे ज्यादा विनय को ग्यारह बार सज़ा मिली है. यह सजा किसी को गाली देने, जेलर के आने पर खड़े न होने, तम्बाकू या किसी के साथ मारपीट करने और कई वजहों से मिलती है, सज़ा के तौर पर दोषियों से उनको जेल में मिलने वाली सहूलियतें वापस ले ली जाती है. किसी भी कैदी को उसके आचरण की वजह से सजा देने की जानकारी बाकायदा सेशन कोर्ट को इसकी जानकारी दी जाती है और उसकी अनुमति के बाद ही कुछ समय तक उसको सज़ा दी जाती है.

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