देश में कुल 1500 स्पेशलिस्ट डॉक्टर, 23000 की जरूरत कोरोना वायरस से निपटने में सरकार की तैयारियां आधी-अधूरी


नई दिल्ली (New Delhi) . भारत में कोरोना (Corona virus) को लेकर व्यापक स्तर पर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं. किंतु स्पेशलिस्ट डॉक्टर (doctor) नहीं होने के कारण, कागजों और दावों में ही कोरोना (Corona virus) से निपटने की बातें हो रही हैं.

आईसीएमआर के महानिदेशक से चर्चा करने के बाद जो वस्तुस्थिति सामने आई हैं. स्पेशलिस्ट डाक्टरों के. नहीं होने के कारण कोरोना जैसी महामारी (Epidemic) से निपटने में सरकार (Government) को अब पसीने आ रहे हैं. देश में कोरोना के इलाज में चेस्ट मेडिसिन और एनेस्थीसिया डॉक्टर (doctor) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. भारत में चेस्ट मेडिसिन के कुल 1500 डॉक्टर (doctor) हैं. जबकि 23000 स्पेशलिस्ट डॉक्टरों (Doctors) की जरूरत है. इसी तरह एनेस्थीसिया के कुल 23000 डॉक्टर (doctor) हैं, जबकि आबादी के अनुसार डेढ़ लाख स्पेशलिस्ट डॉक्टर (doctor) होना चाहिए थे.

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मेडिकल कॉलेज और सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में बेड उपलब्ध नहीं है. देश में कोरोना (Corona virus) की जांच करने के लिए मात्र 72 लैब हैं. कोरोना (Corona virus) की जांच करने और उपचार करने के लिए जो उपकरण आवश्यक है वह भी देश में उपलब्ध नहीं है ऐसी स्थिति में यदि यह वायरस तेजी से फैला तो स्थिति से निपटने में स्वास्थ्य विभाग का अमला सक्षम नहीं है इसको देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सरकार (Government) को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए चिंता से अवगत कराया है उल्लेखनीय है स्वास्थ्य विभाग ने प्रत्येक सरकारी अस्पताल में 5 से 30 बिस्तर कोरोना मरीजों के लिए रिजर्व रखने के लिए निर्देश दिए हैं नई लैब दिल्ली और उड़ीसा में लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है जापान से भी उपकरण क्रय करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है आईसीयू में वेंटिलेटर बढ़ाने के बारे में भी गंभीरता के साथ विचार विमर्श हो रहा है कुल मिलाकर कोरोना (Corona virus) से निपटने के लिए सरकारी स्तर पर जो प्रयास किए जा रहे हैं. वह वर्तमान में सतही स्तर के हैं.

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