डेढ़ साल में हजारों खर्च कर उम्मीद हारी, एक माह के योग से थायराइड में राहत

चित्तौड़गढ़. शहर में अब एक ऐसा अस्पताल भी पहचान बना रहा है, जहां लोग बिना दवा प्राकृतिक चिकित्सा व योग से रोग दूर करने आ रहे. हाल में यहां हाइपर थायराडिज्म जैसी गंभीर बीमारी का इलाज हुआ है. जिसके रोगी को आम तौर पर जीवनभर एलोपैथी की दवा लेनी पड़ती है. कई रोगी तो इसके बाद भी ठीक भी नहीं हो पाते. उल्टा दूसरी गंभीर बीमारियों के शिकार हो जाते हैं. इस राजकीय प्राकृतिक चिकित्सालय ने इस रोग का उपचार कर न केवल बड़ी उपलब्धि हासिल की. बल्कि आमजन में उम्मीद की किरण जगाई.

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कलेक्ट्रेट चौराहा के पास पुराना अस्पताल भवन परिसर में राजकीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र चल रहा है. कुछ समय पहले हाइपर थायराडिज्म ग्रसित बेगूं की 42 वर्षीय शकुंलता पत्नी राजकुमार जैन अंतिम आस लेकर यहां पहुंची. उसने करीब डेढ़ साल तक सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों (Doctors) से दवा ली, लेकिन फर्क नहीं पड़ा. घुटनों के ऑपरेशन की सलाह दी. मन नहीं माना तो भगवान भरोसे घर आ गए. फिर योग एवं आयुर्वेद इलाज का विचार आया.

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चित्तौड़ मुख्यालय पर प्राकृतिक चिकित्सालय में डॉ. लवकुश पाराशर के पास आए. इस अस्पताल में ऐसा पहला केस था. डॉ. पाराशर ने एक महीने नियमित योगाभ्यास कराया तथा आयुर्वेद दवा दी. जिसके सुखद परिणाम सामने आए. फिर से कराई जांच में पूरी रिपोर्ट सामान्य आई. शकुंतला सहित परिजनों की चिंता दूर हो गई. इस केस में सफलता से योग केंद्र को नई उपलब्धि हासिल हुई.

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